देश में बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए केंद्र सरकार ने कफ सिरप के इस्तेमाल को लेकर एक बेहद सख्त और महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नियामक निकायों की चिंताओं के बीच अब कफ सिरप की बोतलों पर लाल रंग में एक स्पष्ट चेतावनी छापने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
इस नए नियम के तहत यह अनिवार्य किया जा रहा है कि हर कफ सिरप की पैकेजिंग और बोतल पर लाल अक्षरों में यह चेतावनी लिखी हो कि यह दवा 4 साल से कम उम्र के बच्चों को देना पूरी तरह वर्जित है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य माता-पिता को सीधे तौर पर सतर्क करना है ताकि वे बिना चिकित्सीय सलाह के बच्चों को ये दवाएं देने से बचें।
यह पूरा घटनाक्रम तब सामने आया जब स्वास्थ्य मंत्रालय और महानिदेशालय (DGHS) द्वारा पहले से ही एडवाइजरी जारी होने के बावजूद यह शिकायतें मिल रही थीं कि शिशुओं और छोटे बच्चों को डॉक्टर या मेडिकल स्टोर के जरिए लगातार कफ सिरप दिए जा रहे हैं। पूर्व में जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन न होने के कारण सरकार ने अब लेबलिंग नियमों में कड़े बदलाव करने का मन बनाया है।
इस बदलाव के तहत ‘ड्रग्स रूल्स, 1945’ के नियम 96 में संशोधन करने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है। लाल रंग की चेतावनी के साथ-साथ यह भी सुझाव दिया गया है कि बोतलों के लेबल पर स्कूल जाने वाले बच्चों की एक तस्वीर (चित्र) भी छापी जाए, जिससे यह संदेश साफ मिल सके कि ये दवाएं केवल बड़े बच्चों के लिए हैं।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और ड्रग्स कंसल्टेटिव कमेटी (DCC) की बैठकों में इन प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया है। सरकार के इस कदम से कफ सिरप के दुरुपयोग पर रोक लगेगी और देश में बाल चिकित्सा सुरक्षा के मानकों को और अधिक मजबूत किया जा सकेगा।

