मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक ऐसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है जहाँ से वापसी की राह मुश्किल नजर आ रही है। ईरान के सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक स्तंभ, ‘साउथ पार्स’ गैस फील्ड पर हुए भीषण हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। यह गैस फील्ड न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, बल्कि इसे कतर के साथ साझा किया जाता है और यह दुनिया के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस भंडारों में शुमार है। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, हमले में गैस टैंकों और रिफाइनरी के मुख्य हिस्सों को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके बाद वहां काम कर रहे हजारों कर्मचारियों को आनन-फानन में सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया और आपातकालीन टीमें आग बुझाने में जुट गई हैं।
इस हमले को ईरान और इजरायल के बीच जारी सीधे टकराव का सबसे बड़ा ‘एस्केलेशन’ माना जा रहा है। इजराइली मीडिया का दावा है कि यह हमला अमेरिका की रणनीतिक सहमति और खुफिया सहयोग के साथ किया गया है। हालांकि इजरायल ने आधिकारिक तौर पर इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन कतर ने इसे सीधे तौर पर इजरायल की कार्रवाई बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। कतर के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि ऊर्जा के बुनियादी ढांचे पर इस तरह के हमले वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए आत्मघाती साबित हो सकते हैं और इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की किल्लत पैदा हो जाएगी।
हमले के तुरंत बाद ईरान का रुख बेहद आक्रामक हो गया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने पड़ोसी अरब देशों—सऊदी अरब, यूएई और कतर—को खुली चेतावनी जारी की है कि उनके ऊर्जा ठिकाने अब ईरान के निशाने पर हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी धरती का उपयोग हमलों के लिए हुआ या क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ी, तो सऊदी की सैमरेफ रिफाइनरी, यूएई का अल होसन गैस फील्ड और कतर की रास लफान रिफाइनरी जैसे ठिकानों को तबाह कर दिया जाएगा। इस धमकी के बाद खाड़ी देशों में हड़कंप मच गया है और कतर ने एहतियात के तौर पर अपने कुछ प्रमुख ऊर्जा केंद्रों को खाली कराना शुरू कर दिया है।
युद्ध की आग अब लेबनान तक भी भीषण रूप से फैल चुकी है। इजरायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के रिहाइशी इलाकों में बड़े हवाई हमले किए हैं, जिसमें कई बहुमंजिला इमारतें मलबे में तब्दील हो गई हैं। खबरों के मुताबिक, इन हमलों में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों घायल हैं। इजरायल का कहना है कि वह उन ठिकानों को निशाना बना रहा है जहाँ से ईरान समर्थित गुट अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। लेबनान में अब तक करीब 900 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और लाखों लोग विस्थापित होकर सड़कों पर रहने को मजबूर हैं।
ईरानी प्रशासन के लिए एक और बड़ा झटका उनके खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब की मौत है। इजरायल ने दावा किया था कि उसने एक सटीक सर्जिकल स्ट्राइक में खातिब को मार गिराया है, जिसकी पुष्टि बाद में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी दुख के साथ की। यह ईरान के सुरक्षा तंत्र में एक बड़ी सेंध मानी जा रही है। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल पर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागीं, जिनमें से कुछ तेल अवीव के पास गिरीं। इन जवाबी हमलों में इजरायल में भी दो नागरिकों की मौत की खबर है, जिससे दोनों पक्षों के बीच बदला लेने की आग और भड़क गई है।
मानवीय दृष्टि से यह संघर्ष अब एक बड़ी त्रासदी का रूप ले चुका है। मानवाधिकार संगठन HRANA की रिपोर्ट के अनुसार, इस युद्ध में अब तक ईरान में 3000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। वहीं, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर ईंधन की कीमतों में आए उछाल के रूप में दिख रहा है। दुनिया भर के शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की जा रही है और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। पार्स गैस फील्ड पर हमला केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को पंगु बनाने वाला कदम साबित हो सकता है।
फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें संयुक्त राष्ट्र और वैश्विक महाशक्तियों पर टिकी हैं कि वे इस विनाशकारी युद्ध को रोकने के लिए क्या कदम उठाते हैं। यदि ईरान अपनी चेतावनी के अनुसार अन्य अरब देशों के ऊर्जा ठिकानों पर हमला करता है, तो यह तीसरा विश्व युद्ध शुरू होने जैसा मंजर होगा। फिलहाल मिडिल ईस्ट के आसमान में बारूद की गंध और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, जिससे भविष्य में बड़े मानवीय और आर्थिक संकट की आशंका बनी हुई है।

