Close Menu
    What's Hot

    महिला एशिया कप 2026: पाकिस्तान को हराकर फाइनल में पहुंचा श्रीलंका, रविवार को भारत से होगा खिताबी मुकाबला

    September 12, 2026

    लद्दाख के लिए गेम-चेंजिंग ‘371(K)’ फॉर्मूला: जमीन, संस्कृति और स्थानीय अधिकारों की सुरक्षा को लेकर केन्द्र में बड़ी तैयारी

    September 12, 2026

    ‘ग्लोबल साउथ’ है वैश्विक संकटों की फ्रंट रो में: प्रधानमंत्री मोदी के दमदार भाषण के साथ 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का शंखनाद

    September 12, 2026
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    DIGITAL INK NEWSDIGITAL INK NEWS
    • होम
    • देश – विदेश
    • छत्तीसगढ़
    • राजनीति
    • क्राइम
    • मनोरंजन
    • खेल
    • राशिफल
    • अन्य
    • हेल्थ
    DIGITAL INK NEWSDIGITAL INK NEWS
    Home»छत्तीसगढ़»छत्तीसगढ़ की जड़ी-बूटियों से महकेगा नारी शक्ति का स्वावलंबन – औषधि पादप बोर्ड की नई कार्ययोजना से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं ग्रामीण महिलाएं
    छत्तीसगढ़

    छत्तीसगढ़ की जड़ी-बूटियों से महकेगा नारी शक्ति का स्वावलंबन – औषधि पादप बोर्ड की नई कार्ययोजना से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख रही हैं ग्रामीण महिलाएं

    Brijesh ChoudharyBy Brijesh ChoudharyMay 3, 2026238 Views
    Facebook Twitter WhatsApp Telegram Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    रायपुर, 03 मई 2026/ छत्तीसगढ़ के वनांचल की गोद में छिपी अमूल्य औषधि संपदा अब केवल स्वास्थ्य का आधार नहीं, बल्कि प्रदेश की नारी शक्ति के आर्थिक स्वावलंबन का नया अध्याय बन रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सुशासन की जिस परिकल्पना को साकार कर रही है, उसे वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप और छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड के अध्यक्ष श्री विकास मरकाम के मार्गदर्शन में धरातल पर उतार रहा है। गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मूसली, जंगली हल्दी, गुड़मार, अश्वगंधा, और शतावरी जैसी महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियों से अर्क और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं।

    पारंपरिक ज्ञान को वैज्ञानिक पहचान

    वनांचल में बिखरे पारंपरिक ज्ञान को महज एक स्मृति न रहने देने के संकल्प के साथ बोर्ड ने इसे वैज्ञानिक पद्धति से जोड़ने का निर्णय लिया है। इसके तहत उन स्थानीय वैद्यों और जानकारों का चिन्हांकन शुरू किया गया है, जिनके पास असाध्य रोगों के उपचार का अद्भुत ज्ञान है। बोर्ड का प्रयास इन महिलाओं को एक उचित मंच प्रदान करना है, ताकि उनकी विशेषज्ञता का लाभ समाज को मिले और वे स्वयं को आर्थिक रूप से सुदृढ़ कर सकें। यह केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि उस विरासत का सम्मान है जिसे ग्रामीण महिलाओं ने सदियों से सहेजकर रखा है। छत्तीसगढ़ में पारंपरिक जड़ी-बूटी और जनजातीय ज्ञान को अब आधुनिक विज्ञान के माध्यम से नई पहचान मिल रही है। राज्य के वनों में छिपे औषधीय खजाने को वैज्ञानिक आधार पर प्रमाणित कर, उसे आजीविका के साधन के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    संग्रहण से प्रसंस्करण तक- उद्यमिता की नई उड़ान

    आर्थिक मोर्चे पर सबसे बड़ा बदलाव तब दिखाई दे रहा है, जब जड़ी-बूटियों का संग्रहण करने वाली महिलाएं अब संग्राहक से आगे बढ़कर निर्माता की भूमिका में नजर आ रही हैं। बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, महिला स्व-सहायता समूहों को औषधि प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) के उन्नत गुर सिखाए जा रहे हैं। यह पहल न केवल औषधीय पौधों का संरक्षण कर रही है, बल्कि वनवासियों और लघु वन उपज संग्राहकों की आय में वृद्धि करके उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है। छत्तीसगढ़ में 1500 से अधिक सक्रिय वैद्यों के ज्ञान को सहेजने और जड़ी-बूटियों के विपणन के लिए छत्तीसगढ़ जनजातीय स्थानीय स्वास्थ्य परंपराएं और औषधीय पादप बोर्ड सक्रिय रूप से काम कर रहा है। यह संस्था हर्बल उत्पादों की खेती, मूल्य संवर्धन, और मार्केटिंग में तकनीकी सहायता और सामुदायिक भागीदारी सुनिश्चित करती है।

    मूल्य संवर्धन (वेल्यू एडिशन)

    छत्तीसगढ़ में जड़ी-बूटी मूल्य संवर्धन एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से राज्य के समृद्ध वन संसाधनों को वैज्ञानिक तरीके से संसाधित (प्रोसेस) करके उनके आर्थिक मूल्य को बढ़ाया जा रहा है। राज्य सरकार ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत इन उत्पादों को बढ़ावा दे रही है। जब ये महिलाएं वनों से प्राप्त कच्ची सामग्री को साफ कर, सुखाकर उसे चूर्ण, अर्क या तेल के रूप में परिवर्तित करती हैं, तो उत्पाद की कीमत और गुणवत्ता कई गुना बढ़ जाती है। इस मूल्य संवर्धन का सीधा आर्थिक लाभ उनके बैंक खातों तक पहुँच रहा है, जिससे बिचौलियों का वर्चस्व पूरी तरह समाप्त हो गया है। गिलोय, कालमेघ, बहेड़ा, सफेद मूसली, जंगली हल्दी, गुड़मार, अश्वगंधा, और शतावरी जैसी महत्वपूर्ण औषधीय वनस्पतियों से अर्क और उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। 65 से अधिक लघु वन उपज प्रजातियों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी और उनका प्रसंस्करण किया जा रहा है। यह पहल छत्तीसगढ़ को एक प्रमुख हर्बल स्टेट के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम है।

    छत्तीसगढ़ हर्बल्स को वैश्विक पहचान

    छत्तीसगढ़, जिसे ‘जड़ीबूटि गढ़’ भी कहा जाता है, अपने घने जंगलों, विशेषकर बस्तर में 160 से अधिक प्रकार की दुर्लभ जड़ी-बूटियों का प्राकृतिक खजाना है। यहाँ की मिट्टी में अश्वगंधा, सर्पगंधा, गोक्षुरा (गोखरू), कुटकी और तिखुर जैसी औषधियां पाई जाती हैं, जो स्वास्थ्य और जीवन शक्ति के लिए प्रसिद्ध हैं। बाजार की चुनौतियों को अवसर में बदलते हुए बोर्ड ने विपणन (मार्केटिंग) तंत्र को पारदर्शी बनाया है। प्रदेश के छत्तीसगढ़ हर्बल्स ब्रांड को सशक्त करने के लिए प्रदर्शनियों और रिटेल आउटलेट्स के माध्यम से इन उत्पादों को सीधे शहरी उपभोक्ताओं तक पहुँचाया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘व्होकल फार लोकल’ और मुख्यमंत्री के ‘लखपति दीदी’ अभियान को सफल बनाने में यह रणनीति संजीवनी का कार्य कर रही है।

    नर्सरी प्रबंधन और स्थानीय रोजगार

    जड़ी बूटियों को किचिन गार्डन, होम गार्डन में खिड़की, बालकनी, टेरिस पर गमलों, या अन्य कंटेनरों में कभी भी उगाया जा सकता है। कंटेनर गार्डनिंग या ग्रो बैग में जड़ी-बूटियां उगाने का एक फायदा यह भी है कि जड़ी-बूटी को उसकी जरूरत के आधार पर मिट्टी, पोषक तत्व, सूर्य प्रकाश और नमी के स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है तथा गमलों में उगाई गई प्रत्येक जड़ी-बूटी (हर्बल) को उसकी आदर्श स्थितियां दे सकते हैं। पर्यावरण संरक्षण और आजीविका के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से औषधीय पौधों की ‘मदर नर्सरी’ विकसित करने की जिम्मेदारी महिला समूहों को सौंपी जा रही है। इससे दुर्लभ जड़ी-बूटियों की प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर महिलाओं के लिए बारहमासी रोजगार के द्वार खुल गए हैं, जिससे वनांचल से होने वाले पलायन पर भी अंकुश लगा है।

    समृद्ध नारी, सशक्त छत्तीसगढ़

    राज्य शासन का यह समेकित दृष्टिकोण इस बात का प्रमाण है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड केवल एक प्रशासक की नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है। सामूहिक नेतृत्व और संस्थागत सुधारों पर जोर देने से आज छत्तीसगढ़ की बेटियां आत्मनिर्भर बन रही हैं। वनांचल की महिलाओं के चेहरे पर उपजी मुस्कान एक समृद्ध और स्वावलंबी छत्तीसगढ़ की सच्ची तस्वीर पेश कर रही है।

    Brijesh Choudhary
    Brijesh Choudhary
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    Related Posts

    छत्तीसगढ़ में पहली बार हो सकता है नेशनल गेम्स का आयोजन, मुख्यमंत्री साय की अध्यक्षता में ओलंपिक संघ की बैठक में बनी रणनीति

    September 12, 2026

    सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों पर खनिज विभाग का त्वरित एक्शन; अवैध खनन एवं परिवहन पर बड़ी कार्रवाई, रेत-मिट्टी और गिट्टी से लदे 4 ट्रैक्टर व 1 हाईवा जप्त

    September 12, 2026

    आधुनिक और नगदी फसलों की खेती ने बदली छत्तीसगढ़ के किसानों की तकदीर छत्तीसगढ़ में खेती ने पकड़ी नई रफ्तार, खेत से बाजार तक बदल रही तस्वीर

    September 12, 2026
    Top Posts

    जग्गी हत्याकांड: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में मामला फिर से ‘रीओपन’, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू, अमित जोगी की दोषमुक्ति पर टिकी निगाहें – 1 अप्रैल को होगी अंतिम सुनवाई

    March 25, 2026590

    छत्तीसगढ़ में शराब की बोतलों का बदला स्वरूप: 1 अप्रैल 2026 से कांच के बजाय प्लास्टिक की बोतलों में मिलेगी शराब, कीमतें भी होंगी कम

    March 24, 2026569

    छत्तीसगढ़ में प्रॉपर्टी टैक्स दाताओं को बड़ी राहत: अब 30 अप्रैल तक बिना किसी सरचार्ज के जमा होगा टैक्स, डेडलाइन बढ़ी

    March 31, 2026568

    शिक्षा मंडल का कड़ा फैसला: पेपर लीक की पुष्टि के बाद 12वीं हिंदी की परीक्षा रद्द, जांच के आदेश, साइबर सेल की रडार पर वायरल करने वाले ग्रुप्स

    March 23, 2026520
    Don't Miss
    खेल

    महिला एशिया कप 2026: पाकिस्तान को हराकर फाइनल में पहुंचा श्रीलंका, रविवार को भारत से होगा खिताबी मुकाबला

    By Brijesh ChoudharySeptember 12, 2026195

    महिला एशिया कप 2026 के दूसरे रोमांचक सेमीफाइनल मुकाबले में श्रीलंका की महिला क्रिकेट टीम…

    लद्दाख के लिए गेम-चेंजिंग ‘371(K)’ फॉर्मूला: जमीन, संस्कृति और स्थानीय अधिकारों की सुरक्षा को लेकर केन्द्र में बड़ी तैयारी

    September 12, 2026

    ‘ग्लोबल साउथ’ है वैश्विक संकटों की फ्रंट रो में: प्रधानमंत्री मोदी के दमदार भाषण के साथ 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का शंखनाद

    September 12, 2026

    छत्तीसगढ़ में पहली बार हो सकता है नेशनल गेम्स का आयोजन, मुख्यमंत्री साय की अध्यक्षता में ओलंपिक संघ की बैठक में बनी रणनीति

    September 12, 2026
    Stay In Touch
    • Facebook
    • Twitter
    • Pinterest
    • Instagram
    • YouTube
    About Us
    About Us

    Brijesh Choudhary
    Editor
    Email: news.digitalink@gmail.com

    Mobile: 9424185333
    Address: New Rajendra Nagar, Raipur, Chhattisgarh – 492001

    Facebook X (Twitter) YouTube WhatsApp
    Our Picks

    महिला एशिया कप 2026: पाकिस्तान को हराकर फाइनल में पहुंचा श्रीलंका, रविवार को भारत से होगा खिताबी मुकाबला

    September 12, 2026

    लद्दाख के लिए गेम-चेंजिंग ‘371(K)’ फॉर्मूला: जमीन, संस्कृति और स्थानीय अधिकारों की सुरक्षा को लेकर केन्द्र में बड़ी तैयारी

    September 12, 2026

    ‘ग्लोबल साउथ’ है वैश्विक संकटों की फ्रंट रो में: प्रधानमंत्री मोदी के दमदार भाषण के साथ 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का शंखनाद

    September 12, 2026
    Most Popular

    जग्गी हत्याकांड: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में मामला फिर से ‘रीओपन’, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू, अमित जोगी की दोषमुक्ति पर टिकी निगाहें – 1 अप्रैल को होगी अंतिम सुनवाई

    March 25, 2026590

    छत्तीसगढ़ में शराब की बोतलों का बदला स्वरूप: 1 अप्रैल 2026 से कांच के बजाय प्लास्टिक की बोतलों में मिलेगी शराब, कीमतें भी होंगी कम

    March 24, 2026569

    छत्तीसगढ़ में प्रॉपर्टी टैक्स दाताओं को बड़ी राहत: अब 30 अप्रैल तक बिना किसी सरचार्ज के जमा होगा टैक्स, डेडलाइन बढ़ी

    March 31, 2026568
    © 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.
    • Home
    • Privacy Policy
    • About Us
    • Contact Us
    • Disclaimer
    • Terms and Conditions

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.