मैसुरु दशहरा के दौरान नंदी ध्वज पूजा में राज्य के कुछ मंत्रियों को कथित तौर पर प्रवेश से रोके जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना के बाद कर्नाटक की सियासत में जोरदार भूचाल आ गया है, और विपक्षी दलों ने सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
घटना के दौरान मैसुरु पैलेस परिसर में ‘जंबू सवारी’ जुलूस के सिलसिले में पारंपरिक नंदी ध्वज पूजा का आयोजन किया गया था। आरोप है कि मौके पर मौजूद पुलिस अधीक्षक (SP) ने सुरक्षा और प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए राज्य के तीन मंत्रियों—शिवराज तंगदगी, पी.एम. नरेंद्र स्वामी और के.एस. बसवंथप्पा—को पूजा स्थल के अंदर जाने से रोक दिया था।
इस अप्रत्याशित अपमान के बाद मौके पर मौजूद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कड़ा रुख अपनाया और खुद हस्तक्षेप करते हुए मंत्रियों को अपने साथ अंदर लेकर गए। मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों के इस रवैये को बेहद गैर-जिम्मेदाराना करार दिया और कहा कि मंत्रियों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुख्य सचिव शालिनी रजनीश को इस घटना की तुरंत जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि घटना के समय के वीडियो फुटेज की बारीकी से जांच की जाए, इसके लिए जिम्मेदार लापरवाह अधिकारियों की पहचान की जाए और जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपी जाए, जिसके बाद दोषियों पर कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के सामने आते ही विपक्षी दलों—विशेषकर बीजेपी और जनता दल (सेक्युलर) यानी JDS—को सरकार पर हमला बोलने का बड़ा मौका मिल गया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि दलित मंत्रियों के साथ किया गया यह बर्ताव कांग्रेस पार्टी की कथित दलित-विरोधी मानसिकता और अहंकार को उजागर करता है।
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद के बीच कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने एक अलग बयान देकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है। उन्होंने घटना को अनावश्यक रूप से जातिगत रंग दिए जाने को “घटिया राजनीति” बताया और कहा कि पुलिसकर्मी केवल अपने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों और निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन कर रहे थे।
उपमुख्यमंत्री ने इस बात पर भी गहरी आपत्ति जताई कि सार्वजनिक चर्चाओं और मीडिया में मंत्रियों को बार-बार ‘दलित मंत्रियों’ के रूप में क्यों संबोधित किया जा रहा है, जबकि वे राज्य के निर्वाचित और जिम्मेदार कैबिनेट मंत्री हैं। बहरहाल, प्रशासनिक स्तर पर जांच के आदेश दे दिए गए हैं और रिपोर्ट आने के बाद ही इस विवाद की असली परतें खुल सकेंगी।

