जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में हाल ही में दीवारों पर लिखे गए विवादित नारों और ग्रैफिटी को लेकर माहौल काफी गर्म हो गया है। इस घटना के बाद से विश्वविद्यालय के भीतर वैचारिक और राजनीतिक तनाव में अचानक तेज उछाल देखने को मिला है, जिससे पूरा परिसर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
विवाद की मुख्य वजह परिसर की विभिन्न दीवारों पर उभरे वे कथित नारे और चित्र हैं, जिन पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। दीवारों पर “फ्री उमर खालिद” (Free Umar Khalid) और “लॉन्ग लाइव नक्सलबाड़ी” (Long Live Naxalbari) जैसे नारे लिखे पाए गए हैं। इसके अलावा, वीर सावरकर के चित्रों के साथ आपत्तिजनक बातें भी लिखी हुई मिली हैं, जिसने इस पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
इन विवादास्पद नारों के सामने आते ही विश्वविद्यालय के छात्र संगठनों के बीच तीखी नोकझोंक और टकराव की स्थिति पैदा हो गई। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने इन गतिविधियों के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया है। एबीवीपी का आरोप है कि परिसर का माहौल बिगाड़ने और वैचारिक अशांति फैलाने के लिए यह एक सुनियोजित प्रयास है, जिसके खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन को तुरंत एक्शन लेना चाहिए।
दूसरी ओर, वामपंथी छात्र संगठनों और अन्य समूहों के बीच भी इन मुद्दों पर गर्मागर्म बहस छिड़ गई है। परिसर में अलग-अलग गुटों के आमने-सामने आने से सुरक्षा और अनुशासन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। छात्र राजनीति से जुड़े ये तमाम संगठन अपने-अपने पक्ष के समर्थन में लामबंद होने लगे हैं, जिससे प्रशासनिक अधिकारियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है और उच्च स्तरीय आंतरिक जांच शुरू कर दी है। परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इन नारों को लिखने और ग्रैफिटी बनाने के पीछे किन-किन छात्रों या तत्वों का हाथ है। प्रशासन कैंपस में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पहचान की इस प्रक्रिया में जो भी छात्र दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ विश्वविद्यालय के नियमों के तहत बेहद सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। मामला वैचारिक सौहार्द बिगाड़ने और परिसरीय अनुशासन के उल्लंघन से जुड़ा होने के कारण, संलिप्त छात्रों के खिलाफ कड़े जुर्माने या हॉस्टल से निष्कासन जैसी बड़ी कार्रवाई किए जाने की पूरी संभावना है।
फिलहाल, जेएनयू प्रशासन ने परिसर में गश्त बढ़ा दी है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा बलों को भी मुस्तैद रखा गया है। विश्वविद्यालय अधिकारियों की यह प्राथमिकता है कि किसी भी कीमत पर शैक्षणिक माहौल प्रभावित न हो और नियमों का उल्लंघन करने वालों को कड़ा संदेश दिया जा सके।

