हाल ही में केंद्र सरकार ने अस्पतालों और मेडिकल सेक्टर में चिकित्सा उपकरणों की मनमानी और अत्यधिक कीमतों पर लगाम कसने के लिए एक बहुत ही सख्त और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आए दिन मरीजों और उनके परिजनों को इलाज के दौरान चिकित्सा उपकरणों पर भारी-भरकम बिल चुकाने पड़ते थे, जिसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस दिशा में ठोस प्रयास शुरू कर दिए हैं।
इस पूरी समस्या का गंभीर खुलासा हाल ही में महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के कमिश्नर की एक रिपोर्ट के माध्यम से सामने आया था। रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ कि अस्पतालों और निजी मेडिकल स्टोरों पर मरीजों को रोजाना इस्तेमाल होने वाले सामान्य उपकरण जैसे सिरिंज, आईवी सेट, और नेबुलाइज़र मास्क आदि उनकी वास्तविक लागत से 10 से 29 गुना यानी लगभग 2,800% तक अधिक दामों पर बेचे जा रहे हैं।
इन गंभीर शिकायतों और रिपोर्ट्स का कड़ा संज्ञान लेते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं रसायन उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा ने फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव को विशेष निर्देश दिए हैं। इसके तहत मेडिकल सेक्टर और अस्पतालों के प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित कर ‘ट्रेड मार्जिन रैशनेलाइजेशन’ पर गंभीर चर्चा की जा रही है, ताकि मुनाफाखोरी पर अंकुश लगाया जा सके।
सरकार ‘ड्रग्स प्राइसेस कंट्रोल ऑर्डर’ (DPCO) के दायरे का विस्तार करने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके लागू होने से इन तमाम मेडिकल कंज्यूमेबल्स और उपकरणों पर प्रभावी मूल्य नियंत्रण (Price Cap) लगाया जा सकेगा, जिससे मनमाने दामों पर लगाम लगेगी और कोई भी संस्थान मरीजों का आर्थिक शोषण नहीं कर पाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से देश के आम नागरिकों और मरीजों के जेब पर पड़ने वाले भारी बोझ में काफी कमी आएगी। अब तक कई जरूरी सर्जिकल सामानों और उपकरणों पर कोई कानूनी मूल्य सीमा तय न होने के कारण अस्पताल अपनी इच्छा के अनुसार कीमतें वसूल रहे थे, जिससे यह ऐतिहासिक पहल मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित होगी।

