छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक बड़ा सर्जरी की गई है, जिसके तहत 42 IAS और 1 IFS अधिकारी के प्रभार बदले गए हैं। इस फेरबदल की सबसे खास बात यह है कि इसमें शासन के शीर्ष स्तर यानी अपर मुख्य सचिव (ACS) और प्रमुख सचिव से लेकर जिलों के कलेक्टरों तक को शामिल किया गया है। राज्य सरकार का यह कदम प्रशासनिक कामकाज में कसावट लाने और विकास कार्यों को नई गति देने के उद्देश्य से उठाया गया माना जा रहा है।
विष्णुदेव साय सरकार के इस आदेश के बाद अब कई महत्वपूर्ण विभागों के मुखिया बदल गए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के प्रभारों में बदलाव कर सरकार ने यह संकेत दिया है कि वह अपनी फ्लैगशिप योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर है। प्रशासनिक गलियारों में इसे अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल माना जा रहा है, क्योंकि इसमें एक साथ इतनी बड़ी संख्या में शीर्ष स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारियों को पुनर्गठित किया गया है।
जिलों की कमान में भी व्यापक बदलाव देखने को मिला है। कई जिलों के कलेक्टरों को मंत्रालय वापस बुलाया गया है, जबकि कुछ नए चेहरों को जिला प्रशासन की कमान सौंपी गई है। कलेक्टर स्तर पर हुए इन बदलावों का सीधा असर मैदानी स्तर पर सरकारी योजनाओं की पहुंच और जनता की समस्याओं के निराकरण पर पड़ेगा। नए कलेक्टरों के सामने आने वाले समय में कानून-व्यवस्था और राजस्व मामलों को सुलझाना एक बड़ी चुनौती होगी।
केवल नियुक्तियां ही नहीं, बल्कि कई अनुभवी अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। इससे विभागों के बीच आपसी तालमेल बेहतर होने और पेंडिंग फाइलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है। शासन का मानना है कि इस फेरबदल से नौकरशाही के ढांचे में नई ऊर्जा का संचार होगा और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
कुल मिलाकर, इस बड़े फेरबदल ने छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये नए अधिकारी अपनी नई भूमिकाओं में किस तरह का प्रभाव छोड़ते हैं और राज्य की विकास दर में किस प्रकार का योगदान देते हैं। फिलहाल, इन तबादलों के बाद पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है।








