छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर के कोनी स्थित शासकीय कुक्कुट पालन परिक्षेत्र में बीते छह दिनों के भीतर 5,000 से अधिक मुर्गा-मुर्गियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और शुरुआती लक्षणों को देखते हुए बर्ड फ्लू (Avian Influenza) की गंभीर आशंका जताई जा रही है। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने पोल्ट्री फार्म को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है और पूरे क्षेत्र को सघन निगरानी में ले लिया गया है।
जानकारी के अनुसार, मुर्गियों के मरने का सिलसिला 18 मार्च से शुरू हुआ था, जो देखते ही देखते महामारी का रूप ले लिया। 6,000 पक्षियों की क्षमता वाले इस सरकारी फार्म में अब तक करीब 85% पक्षी दम तोड़ चुके हैं। इस मामले में फार्म प्रबंधन की बड़ी लापरवाही भी सामने आई है; पक्षियों की मौत शुरू होने के बावजूद उच्च अधिकारियों को समय पर इसकी सूचना नहीं दी गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जानकारी दी जाती, तो संक्रमण को रोकने के प्रयास पहले शुरू किए जा सकते थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए रायपुर से राज्य स्तरीय विशेषज्ञों की एक टीम मंगलवार को बिलासपुर पहुँच रही है। मृत पक्षियों के सैंपल सुरक्षित कर लिए गए हैं, जिन्हें विस्तृत जांच के लिए ICAR-NIHSAD, भोपाल स्थित हाई-टेक लैब भेजा जाएगा। इस लैब की रिपोर्ट आने के बाद ही आधिकारिक तौर पर यह स्पष्ट हो पाएगा कि मौतों का कारण खतरनाक H5N1 वायरस है या कोई अन्य संक्रामक बीमारी। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर फार्म के आसपास के 5 किलोमीटर के दायरे को ‘संवेदनशील क्षेत्र’ घोषित कर दिया है।
पशु चिकित्सा विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि यदि बर्ड फ्लू की पुष्टि होती है, तो प्रभावित क्षेत्र के सभी पालतू पक्षियों को ‘कलिंग’ (नष्ट करने) की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। गौरतलब है कि फरवरी 2025 में भी रायगढ़ जिले में बर्ड फ्लू का प्रकोप देखा गया था, जिसके बाद हजारों पक्षियों को नष्ट करना पड़ा था। वर्तमान में बिलासपुर के कोनी क्षेत्र में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है और स्थानीय निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

