दीपावली से ठीक पहले केंद्र सरकार ने बस्तर संभाग के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क के विस्तार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने बस्तर की 485 बसाहटों को मुख्यधारा से जोड़ने की स्वीकृति प्रदान कर दी है, जिससे वर्षों से दुर्गम क्षेत्रों में रह रहे लोगों का जीवन आसान होगा। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के चौथे चरण के तहत 280 अन्य बसाहटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने के लिए 804.06 करोड़ रुपए की लागत वाले 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव भी प्राप्त हुए हैं।
वर्तमान में बस्तर संभाग की कुल 1,168 बसाहटों में सड़क संपर्क स्थापित करने के लिए विभिन्न चरणों में तेज गति से कार्य चल रहा है। इनमें लगभग 474 अन्य चिन्हांकित बसाहटों के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार किए जा रहे हैं। पीएमजीएसवाई-4 के प्रथम बैच में 234 बसाहटों के सड़क कार्यों को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है, जबकि दूसरे बैच में सभी सातों जिलों की 754 और बसाहटों को बारहमासी सड़क से जोड़ने की कार्ययोजना तैयार की गई है। ग्रामीण सड़क सर्वे ऐप और गति शक्ति योजना के समन्वय से इन क्षेत्रों के सर्वे का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है।
सड़क संपर्क के साथ-साथ बस्तर में पुलों के निर्माण को भी अभूतपूर्व गति मिलने जा रही है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा पीएमजीएसवाई-4 के प्रथम बैच के तहत 206 पुलों और ‘पीएम-जनमन योजना’ के अंतर्गत 167 पुलों के प्रस्तावों पर विचार के लिए उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी, जिन्हें शीघ्र ही अंतिम स्वीकृति मिलने की संभावना है। विशेष रूप से नारायणपुर और अन्य दुर्गम जिलों में लंबे पुलों के निर्माण से वर्षा ऋतु में नदी-नालों के कारण कट जाने वाले गांवों को भारी राहत मिलेगी और आवागमन पूरी तरह सुगम हो सकेगा।
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा द्वारा बस्तर की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों और कम जनसंख्या वाले नक्सलमुक्त गांवों के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मापदंडों में विशेष छूट देने का आग्रह किया गया था। इस पर केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए चार महीने के विशेष सर्वेक्षण की शुरुआत की है। राज्य और केंद्र सरकार के इस समन्वित प्रयास से बस्तर में नक्सलवाद के प्रभाव के खात्मे के साथ-साथ स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और व्यापार के नए द्वार खुल रहे हैं, जिससे इस जनजातीय संभाग के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है।

