छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 3100 करोड़ रुपये के शराब घोटाले में आरोपी निलंबित अधिकारी सौम्या चौरसिया और केके श्रीवास्तव बुधवार को रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा हो गए हैं। सौम्या चौरसिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री की उपसचिव रही हैं, लंबे समय से जेल में बंद थीं। उनकी रिहाई हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद संभव हुई जिसमें शर्त रखी गई थी कि ईओडब्ल्यू (EOW) द्वारा कोर्ट में चालान पेश करने के साथ ही उनकी जमानत प्रभावी होगी।
बुधवार को ईओडब्ल्यू ने विशेष अदालत में सौम्या चौरसिया, केके श्रीवास्तव और अकाउंटेंट देवेंद्र डडसेना के खिलाफ 1500 पन्नों का आठवां पूरक चालान पेश किया। इस चालान में जांच एजेंसी ने दावा किया है कि सौम्या चौरसिया ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए शराब सिंडिकेट को प्रशासनिक संरक्षण और सहायता प्रदान की। वहीं, केके श्रीवास्तव पर अवैध उगाही के पैसों के प्रबंधन और उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है।
जेल से बाहर आने के बाद केके श्रीवास्तव ने मीडिया से बात करते हुए खुद को ‘तांत्रिक’ कहे जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल पूजा-पाठ करते हैं और उनके संबंध पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व अन्य राजनेताओं से पूरी तरह व्यक्तिगत रहे हैं। उन्होंने कहा कि मामला अभी न्यायालय के अधीन है, इसलिए वे ज्यादा कुछ नहीं कहेंगे, लेकिन उन्हें किसी भी जांच से डर नहीं है क्योंकि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया है।
इस पूरे मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शराब घोटाले की जांच ईडी (ED) से शुरू हुई थी, जिसके बाद ईओडब्ल्यू ने भी मामला दर्ज किया। जांच में पाया गया कि नकली होलोग्राम के जरिए सरकारी दुकानों से बिना एक्साइज ड्यूटी चुकाए अवैध रूप से शराब बेची जा रही थी। अब तक इस मामले में कुल 51 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है, और मामले की सुनवाई जारी है।

