नई दिल्ली विधानसभा में हाल ही में हुई चर्चा ने राजधानी के नाम को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। भाजपा विधायक पूनम शर्मा ने सदन में नियम 280 के तहत एक प्रस्ताव पेश किया, जिसमें दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की पुरजोर मांग की गई। उन्होंने तर्क दिया कि दिल्ली का ऐतिहासिक और वास्तविक नाम इंद्रप्रस्थ ही है, जिसे विदेशी आक्रमणकारियों और औपनिवेशिक शासन के दौरान मिटाने की कोशिश की गई। इस प्रस्ताव के साथ ही उन्होंने प्रयागराज (पूर्व में इलाहाबाद) के सफल नाम परिवर्तन का उदाहरण भी पेश किया।
विधायक पूनम शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि ‘दिल्ली’ शब्द बहुत बाद में प्रचलन में आया, जबकि ‘इंद्रप्रस्थ’ हमारी सांस्कृतिक पहचान की असली नींव है। उनके अनुसार, यह नाम हमें औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त करेगा और दिल्ली को वैश्विक स्तर पर एक भव्य और विशिष्ट पहचान दिलाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इंद्रप्रस्थ आज भी जन-मानस की स्मृति में जीवित है और इसे आधिकारिक रूप से अपनाना हमारे स्वर्णिम युग की ओर लौटने जैसा होगा।
नाम परिवर्तन के पीछे ऐतिहासिक और पुरातात्विक साक्ष्यों का हवाला देते हुए विधायक ने बताया कि दिल्ली का गौरवशाली इतिहास सीधे तौर पर महाभारत काल से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि पुराने किले (Purana Qila) में हुई खुदाई और वहां से मिले अवशेष इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह वही भूमि है जहाँ धर्मराज युधिष्ठिर ने धर्म की स्थापना की थी। उनके अनुसार, दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में दबी विरासत इस बात का प्रमाण है कि यह पांडवों की राजधानी थी।
प्रस्ताव के दौरान विधायक ने केवल नाम बदलने की ही मांग नहीं की, बल्कि शहर के विकास के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि पुराने किले और अन्य ऐतिहासिक स्थलों के आसपास पांडवों तथा महाभारत काल से जुड़े भव्य स्मारक और मूर्तियां स्थापित की जानी चाहिए। इससे न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि नई पीढ़ी भी अपने वास्तविक इतिहास और महान विरासत से जुड़ने में सक्षम हो पाएगी।
पूनम शर्मा ने सदन का ध्यान इस ओर भी आकर्षित किया कि ‘इंद्रप्रस्थ’ नाम वर्तमान में भी दिल्ली की रगों में दौड़ रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शहर में पहले से ही इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय (IP University), इंद्रप्रस्थ एस्टेट और इंद्रप्रस्थ पावर स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण संस्थान इसी नाम का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में पूरे शहर का नाम बदलना इस ऐतिहासिक निरंतरता को पूर्णता प्रदान करेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इसी तरह की मांग कर चुके हैं। अब विधानसभा में इस प्रस्ताव के आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, दिल्ली जैसे केंद्र शासित प्रदेश और राष्ट्रीय राजधानी का नाम बदलना एक लंबी संवैधानिक और प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसमें केंद्र सरकार की भूमिका सबसे अहम होगी।

