रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजनीति और समाज के लिए 1 मई 2026 का दिन एक ऐतिहासिक अध्याय के रूप में दर्ज हो गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ विधानसभा में महिलाओं के समग्र विकास और उनके राजनीतिक अधिकारों पर चर्चा के लिए एक दिवसीय विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य देश की सभी विधानसभाओं और संसद में महिलाओं के लिए एक तिहाई (33%) आरक्षण लागू करने के संकल्प पर व्यापक विचार-विमर्श करना था। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि मातृशक्ति उनके लिए केवल श्रद्धा का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश के सृजन और सामर्थ्य की असली पहचान है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि नारी शक्ति समाज के संस्कारों की नींव है। उन्होंने विधानसभा में आयोजित इस विशेष सत्र को एक ‘क्रांतिकारी कदम’ करार दिया। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह सत्र केवल चर्चा का माध्यम नहीं था, बल्कि प्रदेश की आधी आबादी को उनके संवैधानिक अधिकारों से पूर्ण रूप से जोड़ने का एक साझा संकल्प था। उन्होंने सदन में विश्वास जताया कि जब महिलाएं नीति निर्धारण की प्रक्रियाओं में शामिल होंगी, तब विकास की गति और अधिक समावेशी होगी।
सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन की सराहना करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने बीते वर्षों में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की जो मजबूत नींव रखी है, उसे अब राजनीतिक मंच पर विस्तार देने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को विधायी कार्यों में समान अवसर प्रदान करना लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य है। श्री साय ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार केंद्र के महिला आरक्षण के विजन को धरातल पर उतारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
इस महत्वपूर्ण पहल के लिए मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह के मार्गदर्शन में इस विशेष सत्र का सफल आयोजन विधानसभा के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। मुख्यमंत्री ने इस पहल को महिलाओं के सम्मान और गरिमा की रक्षा की दिशा में एक ‘ऐतिहासिक सौगात’ बताया। सदन के भीतर और बाहर इस कदम का स्वागत किया गया और इसे एक प्रगतिशील सोच का परिचायक माना गया।
विशेष सत्र की एक बड़ी विशेषता समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आई महिलाओं की गरिमामयी उपस्थिति रही। खेल, शिक्षा, कला और समाज सेवा जैसे विविध क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं ने सदन की दीर्घा में बैठकर इस चर्चा का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने इन महिलाओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि इनके संघर्ष और सफलता ने ही आज इस ऐतिहासिक संकल्प को स्वर प्रदान किया है। समाज के विभिन्न वर्गों से आए इन सुझावों को नीति निर्माण में शामिल करने की बात भी कही गई।

सदन की कार्यवाही में वरिष्ठ विधायकों और महिला जनप्रतिनिधियों ने भी पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। महिला विधायकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि राजनीति में महिलाओं की बढ़ती सक्रियता से न केवल समाज की समस्याओं का बेहतर समाधान निकलता है, बल्कि संवेदनशीलता के साथ विकास कार्य भी संपन्न होते हैं। सभी सदस्यों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक स्वर में महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने के इस संकल्प का पुरजोर समर्थन किया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष और समाज के सभी वर्गों को एक कड़ा संदेश देते हुए कहा कि नारी शक्ति के सम्मान के मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यह विषय किसी एक राजनीतिक दल का एजेंडा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि सभी को एकजुट होकर इस सकारात्मक पहल का हिस्सा बनना चाहिए ताकि छत्तीसगढ़ देश के सामने महिला सशक्तिकरण का एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत कर सके।
अंततः, इस विशेष सत्र का समापन एक सकारात्मक संकल्प के साथ हुआ, जिसने यह स्पष्ट कर दिया कि छत्तीसगढ़ सरकार महिलाओं को केवल ‘लाभार्थी’ के रूप में नहीं, बल्कि ‘निर्णयकर्ता’ के रूप में देखने की दिशा में तेजी से बढ़ रही है। 1 मई 2026 का यह दिन छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए एक नए युग की शुरुआत के रूप में याद किया जाएगा, जहाँ उनकी आवाज को राज्य की सबसे बड़ी पंचायत में न केवल सुना गया, बल्कि उसे कानून और अधिकार का रूप देने की तैयारी भी की गई।

