छत्तीसगढ़ में जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) और शासन के बीच चल रहे गतिरोध के बाद अब आंदोलन को लेकर स्थिति एक बार फिर बेहद गंभीर हो गई है। हालिया घटनाक्रम के अनुसार, राज्यभर के शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों एवं संबद्ध अस्पतालों में लंबित मांगों को लेकर JDA ने आंदोलन के अगले चरण की कड़ी घोषणा कर दी है, जिसके तहत कल से प्रदेशभर में ओपीडी (OPD) सेवाओं का पूर्ण बहिष्कार किया जाएगा।
इस आंदोलन का मुख्य कारण लंबे समय से अटकी हुई मांगें हैं, जिनमें स्टाइपेंड में बढ़ोतरी, वेतन-मानदेय में संशोधन और बॉन्ड नियमों में सुधार जैसी कुल 17 सूत्रीय मांगें शामिल हैं। संगठन का कहना है कि सरकार के साथ पूर्व में हुई वार्ताओं के बावजूद इन गंभीर मुद्दों पर कोई ठोस और सकारात्मक नीतिगत निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे चिकित्सकों और मेडिकल छात्रों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है।
इससे पहले 18 सितंबर को स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के साथ JDA के प्रतिनिधिमंडल की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी। इस चर्चा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने मांगों के समाधान के लिए 7 दिनों का समय मांगा था, जिसके बाद डॉक्टरों ने मरीजों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए अपने प्रस्तावित आंदोलन को स्थगित कर दिया था और इस अवधि में अपनी नियमित सेवाएं सुचारू रूप से जारी रखी थीं।
हालांकि, JDA का पक्ष है कि निर्धारित सात दिनों की समयावधि पूरी होने के बावजूद उनकी प्रमुख मांगों पर कोई अपेक्षित ठोस निर्णय या लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। इसी वादाखिलाफी और प्रशासनिक उदासीनता के चलते मजबूरन संगठन को एक बार फिर से हड़ताल का कड़ा रुख अपनाने का निर्णय लेना पड़ा है, ताकि शासन तक उनकी आवाज मजबूती से पहुंच सके।
इस बार के आंदोलन के दौरान मरीजों को न्यूनतम असुविधा हो, इसे ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों ने एक मानवीय और अनूठा कदम उठाया है। JDA ने घोषणा की है कि अस्पताल के बाहर समानांतर ओपीडी का संचालन किया जाएगा, ताकि जरूरतमंद और गरीब मरीजों को सड़क पर ही सही, पर आवश्यक चिकित्सकीय परामर्श और राहत उपलब्ध कराई जा सके।
यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर मांगों के समाधान की दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो JDA ने आगामी 28 सितंबर से अपने आंदोलन को और अधिक आक्रामक बनाने की चेतावनी दी है। इसके तहत पीजी रेजिडेंट्स, एमबीबीएस इंटर्न्स, बॉन्डेड मेडिकल ऑफिसर और सीनियर रेजिडेंट्स द्वारा इमरजेंसी सेवाओं से भी हटने का चरण प्रस्तावित किया गया है।

