छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले से सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ की एक बड़ी खबर सामने आई है। छोटेबेठिया-परतापुर थाना क्षेत्र के सीमावर्ती जंगलों में सुरक्षाबलों ने एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन को अंजाम देते हुए नक्सली संगठन को तगड़ा झटका दिया है। इस मुठभेड़ में जवानों ने एक महिला नक्सली को मार गिराया है, जिसकी शिनाख्त एक बड़े कैडर की सदस्य के रूप में हुई है।
मारी गई महिला नक्सली की पहचान एसीएम (ACM) रैंक की कमांडर रंगाबोइना भाग्या उर्फ रूपी के रूप में की गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, रूपी पर शासन की ओर से 4 लाख रुपए का ईनाम घोषित था। सुरक्षाबलों के लिए यह सफलता इसलिए भी अहम है क्योंकि रूपी को बस्तर के माड़ डिवीजन में सक्रिय अंतिम तेलुगू माओवादी कैडर माना जा रहा था। कांकेर के पुलिस अधीक्षक (SP) निखिल राखेचा ने आधिकारिक तौर पर इस मुठभेड़ और रूपी के मारे जाने की पुष्टि की है।
घटना के संदर्भ में मिली जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा बल के जवान माचपल्ली, आरामझोरा और हिडूर क्षेत्र के जंगलों में गश्त पर निकले थे। पुलिस को इन इलाकों में नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता सूचना मिली थी। जैसे ही जवान माचपल्ली के घने जंगलों में पहुँचे, वहां पहले से घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। जवानों ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की, जिसमें रूपी ढेर हो गई।
रूपी का नक्सली इतिहास काफी पुराना था; वह साल 2004 में माओवादी संगठन से जुड़ी थी और पिछले 24 वर्षों से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रही थी। वह डीकेएसजेडसी (DKSZC) सदस्य विजय रेड्डी की पत्नी थी। गौरतलब है कि विजय रेड्डी पहले ही 2025 में मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में हुई एक मुठभेड़ में मारा जा चुका था। रूपी की मौत से माओवादी संगठन के पुराने और अनुभवी कैडर का एक और स्तंभ ढह गया है।
मुठभेड़ थमने के बाद जब सुरक्षाबलों ने इलाके की तलाशी ली, तो वहां से महिला नक्सली का शव बरामद हुआ। शव के पास से एक पिस्टल, भारी मात्रा में गोला-बारूद और नक्सलियों के दैनिक उपयोग की अन्य सामग्रियां भी जब्त की गई हैं। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इलाके में अभी भी सर्चिंग ऑपरेशन जारी है ताकि क्षेत्र में छिपे अन्य संभावित नक्सलियों का पता लगाया जा सके और सुरक्षा घेरा मजबूत किया जा सके।
इस सफल ऑपरेशन के बाद बस्तर रेंज के आईजी सुन्दरराज पट्टलिंगम ने भी अपना बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि शासन की पुनर्वास नीति के तहत नक्सलियों को लगातार मुख्यधारा में लौटने का मौका दिया जा रहा है और बड़ी संख्या में लोग इसका लाभ उठा भी रहे हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग हिंसा का मार्ग नहीं छोड़ेंगे, उनका अंत रूपी जैसा ही होगा। आईजी ने बचे हुए नक्सलियों से अपील की है कि वे समय रहते हथियार डालकर सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की शुरुआत करें।

