बिलासपुर में बर्ड फ्लू की दस्तक ने पोल्ट्री व्यवसाय को गहरे संकट में डाल दिया है। संक्रमण की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से प्रभावित क्षेत्र के 10 किलोमीटर के दायरे में मांस और मुर्गा दुकानों को पूरी तरह बंद कर दिया है। पिछले 15 दिनों से जारी इस प्रतिबंध के कारण व्यापारियों और उनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, जिससे नाराज व्यापारियों ने अब प्रशासन के सामने अपनी गुहार लगानी शुरू कर दी है।
मंगलवार को बिलासपुर पोल्ट्री एसोसिएशन के सदस्य कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। व्यापारियों का कहना है कि वे पहले ही नवरात्रि के दौरान प्रतिबंध के कारण नुकसान झेल चुके थे और अब बर्ड फ्लू की मार ने उनके व्यवसाय की कमर तोड़ दी है। उन्होंने दावा किया कि इस तालाबंदी की वजह से पोल्ट्री क्षेत्र को प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो रहा है, जिससे उबरना अब उनके लिए चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।
प्रशासनिक स्तर पर स्थिति का जायजा लेने के लिए केंद्रीय जांच कमेटी की 4 सदस्यीय टीम सोमवार को बिलासपुर पहुंची। इस टीम ने हॉटस्पॉट माने जा रहे कुक्कुट पालन केंद्रों और आसपास के कंटेनमेंट जोन का सूक्ष्मता से निरीक्षण किया। विशेषज्ञों की यह टीम जमीनी हालातों और संक्रमण के फैलाव के खतरे का आकलन कर रही है। फिलहाल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दुकानों को फिर से खोलने का फैसला पूरी तरह से इस केंद्रीय टीम की अंतिम जांच रिपोर्ट के आधार पर ही लिया जाएगा।
व्यापारियों ने मांग की है कि प्रशासन सुरक्षा के कड़े नियमों और गाइडलाइंस के साथ दुकानें खोलने की अनुमति दे। उनका तर्क है कि अनिश्चितकालीन बंदी से न केवल व्यापारी, बल्कि इस चेन से जुड़े हजारों मजदूर भी आर्थिक तंगी का शिकार हो रहे हैं। अब सबकी निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि शहर में मांस का कारोबार कब बहाल होगा और पोल्ट्री संचालकों को इस आर्थिक भंवर से निकलने का मौका कब मिलेगा।

