रायपुर/जगदलपुर, 21 मार्च 2026। बस्तर जिले के विकासखंड जगदलपुर की ग्राम पंचायत आड़ावाल की सरपंच जयंती कश्यप ने ग्रामीण नेतृत्व और महिला सशक्तिकरण की एक नई इबारत लिखी है। उनके उत्कृष्ट कार्यों और सामाजिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। यह उपलब्धि न केवल आड़ावाल पंचायत के लिए, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए गौरव का विषय बनकर उभरी है।
गत 11 मार्च 2026 को नई दिल्ली में यूनिसेफ द्वारा ‘सशक्त पंचायत नेत्री अभियान’ के तहत एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस गरिमामय समारोह में केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने जयंती कश्यप को उनके अनुकरणीय नेतृत्व के लिए सम्मानित किया। हालांकि इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के 12 अन्य सरपंच भी उपस्थित थे, लेकिन बस्तर की जमीनी समस्याओं पर जयंती कश्यप की पकड़ और उनके द्वारा किए गए ठोस सुधारों को मंत्रालय में विशेष रूप से सराहा गया।
जयंती कश्यप के कार्यकाल में आड़ावाल पंचायत में विकास की एक नई बयार बही है। उन्होंने अपने नेतृत्व में पेयजल प्रबंधन, स्वच्छता और सामुदायिक स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रशासन और जनता के बीच एक सेतु का काम करते हुए उन्होंने निर्धन परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने और शासन की विभिन्न सामाजिक सहायता योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों से गांव की बुनियादी संरचना में व्यापक सुधार देखने को मिला है।
पर्यावरण और जल संरक्षण के क्षेत्र में सरपंच जयंती कश्यप के प्रयास मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। “पानी बचाओ” अभियान के माध्यम से उन्होंने ग्रामीणों को जल की एक-एक बूंद की कीमत समझाई है। उनके मार्गदर्शन में गांव में वर्षा जल संचयन के लिए तालाबों और डबरी का निर्माण किया गया है। साथ ही, भूजल स्तर को सुधारने के लिए सोखता गड्ढे और वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जैसे तकनीकी समाधानों को गांव-गांव तक पहुँचाया गया है, जिससे खेती और निस्तारी के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई है।
सरपंच जयंती कश्यप का मानना है कि जल संरक्षण और स्वच्छता केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव हैं। उनके इस विजन ने ग्रामीणों की सोच में बड़ा बदलाव लाया है। आज गांव के लोग न केवल उनके अभियानों से जुड़ रहे हैं, बल्कि घर से निकलने वाले बेकार पानी का उपयोग किचन गार्डन में करने जैसी छोटी लेकिन प्रभावी आदतों को अपना रहे हैं। यह सामूहिक भागीदारी ही आड़ावाल को एक ‘आदर्श ग्राम’ की दिशा में ले जा रही है।
अंततः, जयंती कश्यप का यह सम्मान यह सिद्ध करता है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो सीमित संसाधनों के बीच भी ग्रामीण भारत की तस्वीर बदली जा सकती है। उनकी कार्यशैली और समर्पण बस्तर की अन्य महिलाओं और पंचायत प्रतिनिधियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे आज उस सशक्त पंचायत नेत्री के रूप में उभरी हैं, जो आधुनिक सोच और पारंपरिक मूल्यों के मेल से समाज में सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं।

