बिलासपुर के बिलासा देवी चकरभाठा एयरपोर्ट के विकास में लंबे समय से चली आ रही जमीन की बाधा अब पूरी तरह समाप्त हो गई है। हवाई सेवा शुरू होने के पांच साल बाद, सेना ने औपचारिक रूप से अपनी 290.8 एकड़ जमीन जिला प्रशासन को हस्तांतरित कर दी है। इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया के लिए जबलपुर के रक्षा संपदा अधिकारी और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल के साथ स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इस हस्तांतरण के बाद अब एयरपोर्ट के पास कुल 646.8 एकड़ जमीन उपलब्ध हो गई है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने के लिए पर्याप्त है।
इस अतिरिक्त भूमि की उपलब्धता से एयरपोर्ट को अब ‘4-सी’ (4C) श्रेणी में अपग्रेड करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। वर्तमान में यहाँ का रनवे केवल 1498 मीटर लंबा है, जिस पर केवल 72-सीटर एटीआर विमान ही उतर सकते हैं। रनवे की लंबाई कम होने के कारण बड़े यात्री विमानों का संचालन संभव नहीं था। अब प्रशासन की योजना इस रनवे को 2800 मीटर तक विस्तार देने की है, जिससे दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों से एयरबस और बोइंग जैसे बड़े विमानों की आवाजाही सीधे बिलासपुर से शुरू हो सकेगी।
जमीन हस्तांतरण की यह प्रक्रिया राज्य और केंद्र सरकार के बीच लंबे समन्वय का परिणाम है। पूर्व में सेना की छावनी का प्रस्ताव रद्द होने के बाद राज्य सरकार ने जमीन वापसी की मांग की थी। हालांकि, चुनाव और सीमांकन की प्रक्रियाओं के कारण इसमें देरी हुई, लेकिन हाल ही में रक्षा विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने सीमांकन कार्य पूरा किया। इस सौदे के लिए वर्तमान बाजार दर के आधार पर 70 करोड़ रुपये की राशि तय की गई है, जिसके लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने दिल्ली स्तर पर विशेष प्रयास किए थे।
एयरपोर्ट के भविष्य को देखते हुए जिला प्रशासन ने 198 करोड़ रुपये का एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया है। इस योजना के तहत 80 करोड़ रुपये केवल रनवे विस्तार पर खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा, वर्तमान में चल रहे अस्थायी एटीसी सेंटर की जगह अब 41 करोड़ रुपये की लागत से 22 मीटर ऊंचा स्थायी और अत्याधुनिक एटीसी टॉवर बनाया जाएगा। साथ ही, रनवे स्ट्रिप के चौड़ीकरण के लिए 40 करोड़ रुपये और रनवे लाइटिंग के लिए 5 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे रात में विमानों का परिचालन सुरक्षित हो सके।
तकनीकी सुरक्षा को बढ़ाने के लिए मास्टर प्लान में 17 करोड़ रुपये ‘इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम’ (ILS) और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों के लिए आवंटित किए गए हैं। आईएलएस सुविधा शुरू होने से कोहरे या खराब दृश्यता के दौरान भी विमान आसानी से लैंड कर सकेंगे, जिससे उड़ानों के रद्द होने की समस्या कम होगी। इसके साथ ही एयरपोर्ट के चारों ओर लगभग 4.70 किलोमीटर लंबी नई बाउंड्री वॉल का निर्माण भी किया जाएगा ताकि सुरक्षा मानकों को और कड़ा किया जा सके।
बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा है कि जमीन मिलने के बाद अब सभी विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। अतिरिक्त भूमि मिलने से रनवे के विस्तार में आ रही सभी तकनीकी रुकावटें दूर हो गई हैं। जैसे ही शासन से बजट की मंजूरी मिलेगी, निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाएगा। हवाई सुविधा जनसंघर्ष समिति ने भी इस फैसले का स्वागत किया है, क्योंकि यह विस्तार बिलासपुर संभाग की आर्थिक और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।
इस विस्तार के पूर्ण होते ही बिलासपुर छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख एविएशन हब बनकर उभरेगा। बेहतर हवाई सुविधा न केवल स्थानीय यात्रियों के लिए राहत लाएगी, बल्कि इससे उत्तर छत्तीसगढ़ में व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को भी गति मिलेगी। बड़े विमानों के आने से विमानन कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, जिससे अंततः आम जनता को सस्ते हवाई टिकटों का लाभ मिलने की उम्मीद है।

