मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में तनाव एक बार फिर से अपने चरम पर पहुंच गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी और इजरायली रणनीतिकार आगामी मिड-टर्म चुनावों के बाद ईरान पर एक बार फिर से बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करने की योजना बना रहे हैं। अमेरिका और इजरायल के बीच हालिया उच्च स्तरीय बैठकों में इस संभावित हमले की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसे लेकर दोनों देश बेहद गंभीर नजर आ रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस संभावित सैन्य अभियान में ईरान के प्रमुख सैन्य ठिकानों, परमाणु स्थलों और शासन से जुड़े महत्वपूर्ण केंद्रों को निशाना बनाया जा सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिकी प्रशासन और इजरायली नेतृत्व ने चुनावों से पहले किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध से बचने के लिए फिलहाल इस ऑपरेशन को कुछ समय के लिए टाल दिया था, लेकिन चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद यह विकल्प उनके एजेंडे में सबसे ऊपर है।
इसी बीच, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने हाल ही में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की है। इस गुप्त और महत्वपूर्ण बैठक में दोनों देशों के रक्षा अधिकारियों के बीच ईरान के खिलाफ भावी रणनीतिक कदमों, हथियारों के समन्वय और संभावित हमलों की समय-सीमा पर विस्तार से चर्चा हुई है। इस मुलाकात के बाद से ही पश्चिम एशिया में युद्ध की आशंकाएं और अधिक गहरी हो गई हैं।
अमेरिका और इजरायल की इन युद्धक तैयारियों के जवाब में तेहरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए कड़ी चेतावनी जारी की है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के एक शीर्ष प्रवक्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि अमेरिका और इजरायल ने दोबारा दुसाहस किया, तो उन्हें ईरान की ऐसी सैन्य ताकत का सामना करना पड़ेगा जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की होगी।
अपनी इस चेतावनी के तहत ईरानी अधिकारियों ने ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ (FOB) का जिक्र किया है। ईरानी मीडिया के अनुसार, तेहरान का दावा है कि यदि अमेरिका के पास ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ (MOAB) जैसा भारी-भरकम हथियार है, तो ईरान भी जल्द ही अपने ‘फादर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेगा, जो दुश्मनों के लिए पूरी तरह से नया और अप्रत्याशित हथियार साबित होगा।
ईरानी रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार उनका जवाब केवल पारंपरिक या रक्षात्मक नहीं होगा, बल्कि वे असममित युद्ध की रणनीति अपनाएंगे। तेहरान ने खुली चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष का दायरा बढ़ा, तो वे न केवल इजरायल और अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाएंगे, बल्कि क्षेत्र के ऊर्जा बुनियादी ढांचे, तेल प्रतिष्ठानों और समुद्र के नीचे बिछी महत्वपूर्ण इंटरनेट केबल्स को भी बाधित कर सकते हैं।
फिलहाल, इस स्थिति ने वैश्विक कूटनीति में हलचल पैदा कर दी है और दुनिया भर के देश मिडिल ईस्ट के हालात पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। एक तरफ जहां सैन्य तैयारियां तेजी से चल रही हैं, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक स्तर पर इस बड़े संघर्ष को टालने के प्रयास भी किए जा रहे हैं, लेकिन वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए क्षेत्र में अनिश्चितता और तनाव का माहौल पूरी तरह से बना हुआ है।

