मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्यादान और विवाह सहायता योजना के तहत हुए एक बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। इस योजना के तहत गरीब पंजीकृत निर्माण श्रमिकों की बेटियों के विवाह के लिए सरकार द्वारा दी जाने वाली आर्थिक सहायता राशि में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने कागजों पर फर्जीवाड़ा कर सरकारी खजाने को करोड़ों का चूना लगाया है।
इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य सूत्रधार विदिशा जिले की सिरोंज जनपद पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को बताया गया है। आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान (वर्ष 2019 से नवंबर 2021 के बीच) अन्य सहयोगियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के साथ मिलकर कुल 5,923 फर्जी विवाहों के संदिग्ध प्रकरण तैयार किए। इन फर्जी मामलों के जरिए कुल 30.18 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत कराकर वितरित की गई।
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस घोटाले को अंजाम देने के लिए अपात्र लोगों के फर्जी आवेदन और कूटचित दस्तावेज तैयार किए गए थे। इन दस्तावेजों के आधार पर दर्जनों बैंक खाते खोले गए, जिनमें योजना की सहायता राशि ट्रांसफर कराई जाती थी। राशि खातों में पहुंचते ही उसे अलग-अलग किस्तों में तुरंत नकद निकाल लिया जाता था, ताकि किसी को शक न हो।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस दौरान देश में कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन का दौर चल रहा था, जब सार्वजनिक आयोजनों और शादियों पर पूरी तरह पाबंदी थी। इसके बावजूद, नियमों और प्रतिबंधों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से फर्जी विवाहों के मामलों को मंजूरी दी गई और बड़े पैमाने पर सरकारी फंड का दुरुपयोग किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए भोपाल आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की। ED ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और कानूनी कार्रवाई के तहत उनकी तथा उनके सहयोगियों की 5.37 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच (कुर्क) कर दिया है। इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की संलिप्तता की भी गहराई से जांच की जा रही है।

