प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा किसानों के हित में लगातार दूरगामी निर्णय लिए जा रहे हैं, जो देश के अन्नदाताओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं। इसी कड़ी में हाल ही में राजधानी रायपुर के इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित स्वामी विवेकानंद सभागार में ‘पीएम किसान उत्सव दिवस’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और किसानों को संबोधित किया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के बनासकांठा से ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना’ की 24वीं किस्त के रूप में देश के 9 करोड़ 34 लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के माध्यम से 18,690 करोड़ रुपए से अधिक की राशि अंतरित की है। उन्होंने कहा कि यह योजना छोटे और सीमांत किसानों की खेती-किसानी से जुड़ी दैनिक और मौसमी आवश्यकताओं को पूरा करने में एक मजबूत संबल प्रदान कर रही है।
छत्तीसगढ़ के संदर्भ में आंकड़े साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इस 24वीं किस्त के अंतर्गत प्रदेश के 24 लाख 59 हजार 707 किसानों के बैंक खातों में 498 करोड़ 48 लाख रुपए की राशि सीधे ट्रांसफर की गई है। इसके साथ ही, इस योजना के आरंभ से लेकर अब तक छत्तीसगढ़ के किसानों को कुल 24 किस्तों में 11,776 करोड़ 50 लाख रुपए से अधिक की सहायता राशि प्रदान की जा चुकी है, जिससे पूरी वितरण प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और सुगम बनी है।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार धान खरीदी के मोर्चे पर भी पूरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के तहत प्रदेश में 15 नवंबर से धान खरीदी शुरू की जाएगी, जिसके लिए किसानों को 3,100 रुपए प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदी का लाभ मिलेगा। यह दर देश में धान खरीदी की जाने वाली सर्वोच्च दरों में शामिल है।
धान खरीदी की प्रक्रिया को और अधिक सुलभ बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा प्रदेश भर में 360 नए उपार्जन केंद्र खोले जा रहे हैं, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी और उन्हें सभी आवश्यक सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही मिल सकेंगी। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक खेती के साथ-साथ जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन और मत्स्यपालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि किसानों की आय के वैकल्पिक स्रोत विकसित हो सकें।
प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों के हितों की रक्षा के लिए भी राज्य सरकार पूरी तत्परता के साथ खड़ी है। चक्रवात ‘अर्नब’ के कारण प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में फसलों को हुए नुकसान का जायजा लेने और तत्काल सर्वेक्षण कराने के लिए सभी जिला कलेक्टरों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। सर्वेक्षण के उपरांत प्रभावित किसानों को आर.बी.सी. 6-4 के प्रावधानों और निर्धारित मानदंडों के अनुसार पारदर्शी तरीके से समय पर राहत और मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना’ का जिक्र करते हुए बताया कि इसके तहत पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष 10,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। अंत में, अतिथियों ने विश्वास जताया कि सरकार के इन समन्वित और किसान-हितैषी प्रयासों से गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और विकसित छत्तीसगढ़ व विकसित भारत का संकल्प साकार होगा।

