अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के मुख्यालय पासीघाट में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की ‘सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना’ को लेकर स्थानीय लोगों का विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक हो गया। पिछले कुछ दिनों से इस मेगा प्रोजेक्ट के खिलाफ क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ था, जो पासीघाट में बुलाए गए 12 घंटे के बंद के दौरान पूरी तरह उग्र रूप ले लिया।
बंद के दौरान स्थिति उस समय बेकाबू हो गई जब प्रदर्शनकारियों और उपद्रवियों की उग्र भीड़ ने कानून को अपने हाथ में ले लिया। भीड़ ने नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (NHPC) के स्थानीय कार्यालय पर धावा बोल दिया और वहां जमकर तोड़फोड़ करते हुए आग लगा दी। इस दौरान सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया और कई दस्तावेजों को भी आग के हवाले कर दिया गया।
हिंसा का दायरा यहीं नहीं रुका, बल्कि उपद्रवियों ने एक स्थानीय पुलिस थाने को भी निशाना बनाया और उसे जला दिया। थाने के बाहर और परिसर में खड़े कई पुलिस वाहनों तथा निजी वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इसके अलावा, कुछ स्थानीय राजनीतिक नेताओं के आवासों पर भी हमला किया गया और वहां तोड़फोड़ की घटना को अंजाम दिया गया।
इस हिंसक झड़प और आगजनी की घटनाओं में कई सुरक्षाकर्मी, पुलिसकर्मी और आम नागरिक गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तुरंत अतिरिक्त बलों को बुलाया, लेकिन भीड़ के आक्रामक तेवर को देखते हुए सामान्य पुलिस बल नाकाफी साबित हुआ।
हालात की नजाकत को भांपते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने तुरंत कड़ा रुख अपनाया और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की विशेष दंगा-रोधी इकाई—रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की दो कंपनियों को मैदान में उतार दिया। लगभग 250 से अधिक आरएएफ जवानों को विशेष विमान के जरिए नवी मुंबई से सीधे पासीघाट एयरलिफ्ट कर भेजा गया ताकि फौरन मोर्चे पर स्थिति संभाली जा सके।
इस भारी विरोध और गुस्से के मूल में स्थानीय जनजातीय समुदायों और विभिन्न संगठनों की गहरी चिंताएं जुड़ी हुई हैं। स्थानीय लोगों का कड़ा तर्क है कि 11,200 मेगावाट की इस विशाल जलविद्युत परियोजना के निर्माण से उनके पारंपरिक गांव, उपजाऊ जमीनें और घने जंगल हमेशा के लिए जलमग्न हो जाएंगे, जिससे उनकी पीढ़ियों पुरानी आजीविका और सांस्कृतिक पहचान पर गंभीर संकट आ जाएगा।
दूसरी ओर, केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियां इस परियोजना को देश की सुरक्षा और सामरिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मानती हैं। सरकार का मानना है कि चीन द्वारा सीमा के उस पार ब्रह्मपुत्र नदी पर बनाए जा रहे मेगा प्रोजेक्ट्स के रणनीतिक जवाब के रूप में यह परियोजना भारत की सीमाओं को मजबूत करने और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने हिंसा पर गहरा खेद जताया है और जनता से संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि लोकतांत्रिक विरोध के नाम पर कानून और व्यवस्था को अपने हाथ में लेने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार फ्लैग मार्च किया जा रहा है ताकि आम जनजीवन को सामान्य बनाया जा सके।

