पश्चिम एशिया से भारत का कच्चे तेल (Crude Oil) का आयात एक बार फिर युद्ध से पहले के स्तर पर पहुंच गया है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय रिफाइनरियों द्वारा पश्चिम एशिया से हर दिन लगभग 28 लाख बैरल क्रूड ऑयल मंगाया जा रहा है, जो भू-राजनीतिक उथल-पुथल के दौर के बाद एक बड़ा बदलाव है।
आंकड़ों पर गौर करें तो सितंबर महीने में पश्चिम एशिया से भारत का कच्चा तेल आयात अगस्त के मुकाबले पूरे 32 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया है। इस तेज उछाल के साथ ही, देश के कुल तेल आयात में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 54 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है, जो पारंपरिक बाजारों पर भारत की मजबूत निर्भरता को फिर से रेखांकित करता है।
पश्चिम एशिया से आपूर्ति में यह सुधार और आयात बढ़ने का सबसे बड़ा कारण दोनों क्षेत्रों के बीच तेल की कीमतों और ढुलाई लागत का प्रतिस्पर्धी होना है। रिफाइनिंग क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में पश्चिम एशिया (विशेषकर इराक और अन्य खाड़ी देशों) से मिलने वाले तेल की कुल लागत और रूसी तेल के दाम लगभग एक समान स्तर पर आ गए हैं।
खाड़ी देशों से आपूर्ति सुगम होने और दाम प्रतिस्पर्धी मिलने के चलते भारत द्वारा रूस से किए जाने वाले तेल आयात में खासी गिरावट दर्ज की गई है। सितंबर के दौरान रूस से होने वाला आयात पिछले महीने की तुलना में करीब 14 प्रतिशत घटकर 18 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया है।
इस बदलाव का सीधा असर भारतीय तेल खरीद के कंपोजीशन पर पड़ा है। भारत की कुल तेल खरीद में रूस की हिस्सेदारी जो कभी अपने चरम पर थी और लगभग 46.6 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, वह अब घटकर सीधे 33.5 प्रतिशत पर आ गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिफाइनरियां किसी एक स्रोत पर निर्भर रहने के बजाय हमेशा से लागत, उपलब्धता और बाजार के हालात के हिसाब से अपने विकल्प चुनती रही हैं। चूंकि अब पश्चिम एशिया के उत्पाद पहले की तरह अधिक आकर्षक और सुलभ हो गए हैं, इसलिए भारतीय कंपनियों ने पारंपरिक खाड़ी स्रोतों की ओर दोबारा रुख किया है।
वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों के उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की अनिश्चितताओं के बीच भारत का यह कदम ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पश्चिम एशिया का यह दबदबा यूं ही बना रहता है या वैश्विक समीकरणों के बदलने से तेल आयात के आंकड़ों में फिर से कोई नया फेरबदल देखने को मिलता है।

