अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव और गतिरोध को समाप्त कराने के लिए पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने हाल ही में तेहरान का दौरा किया था। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अमेरिका की तरफ से मध्यस्थता की भूमिका निभाते हुए दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते तलाशना था, ताकि पश्चिम एशिया में शांति स्थापित की जा सके।
हालांकि, ईरान ने अमेरिकी प्राथमिकताओं और दबाव के आगे झुकने से साफ इनकार कर दिया है। तेहरान के दौरे पर पहुंचे पाकिस्तानी सेना प्रमुख को ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने अपनी कड़ी और स्पष्ट नीति से अवगत करा दिया।
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने पाकिस्तानी आर्मी चीफ के साथ हुई बैठक के बाद दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के तहत तैयार किए गए संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) का एक ग्राम भी देश से बाहर नहीं भेजेगा। इसे ईरान ने अपनी राष्ट्रीय संपत्ति और सुरक्षा का अभिन्न हिस्सा बताया है।
तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत शुरू होने से पहले कड़ी शर्तें रखी हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक अमेरिका विश्वास बहाली के लिए ठोस कदम नहीं उठाता और ईरान की सभी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक कूटनीतिक वार्ता का कोई औचित्य नहीं है।
ईरान की ओर से यह भी साफ कर दिया गया है कि बातचीत की प्रक्रिया शुरू होने से पहले अमेरिका को ईरान पर लगी तेल पाबंदियों को हटाना होगा, देश के विदेशी संपर्कों और वित्तीय संपत्तियों की नाकेबंदी खत्म करनी होगी, तथा मध्य क्षेत्र में सैन्य आक्रामकता व शत्रुता को रोकना होगा।
ईरानी नेतृत्व ने यह भी हवाला दिया कि देश के सर्वोच्च नेतृत्व के रुख के मुताबिक, हथियार बनाने के स्तर के करीब पहुंचे यूरेनियम को किसी भी कीमत पर देश की सीमा से बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। ईरान का यह भी मानना है कि अमेरिका की मंशा और उसके वादों पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता है।
इस प्रकार, पाकिस्तान के आर्मी चीफ की यह मध्यस्थता यात्रा फिलहाल ईरान के सख्त रुख और अडिग फैसलों के सामने बेअसर नजर आई है। ईरान के इस कड़े तेवर से यह स्पष्ट हो गया है कि जब तक अमेरिका तेहरान की शर्तों को पूरी तरह स्वीकार नहीं करता, तब तक दोनों देशों के बीच संवाद की बहाली बेहद मुश्किल है।

