नई दिल्ली। देश के युवाओं में फैटी लिवर की समस्या तेजी से एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप लेती जा रही है। हाल ही में एम्स (AIIMS) और अन्य प्रमुख चिकित्सा संस्थानों के मेडिकल अध्ययनों में यह चिंताजनक खुलासा हुआ है कि कम उम्र के भारतीय नागरिकों में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस समस्या को शुरुआती दौर में ही नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह भविष्य में ‘लिवर सिरोसिस’ और लिवर फेलियर जैसी जानलेवा बीमारियों का रूप ले सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं में इस बीमारी के पैर पसारने का सबसे बड़ा कारण उनकी आधुनिक और असंतुलित जीवनशैली है। आज की युवा पीढ़ी में जंक फूड, फास्ट फूड, मैदे से बनी चीजों, और अत्यधिक चीनी वाले कोल्ड ड्रिंक्स या पैकेटबंद जूस का सेवन बहुत आम हो गया है। इसके अलावा, शारीरिक सक्रियता की भारी कमी यानी सिडेंट्री लाइफस्टाइल के कारण शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा पड़ जाता है, जो लिवर में चर्बी जमने की मुख्य वजह बनता है।
1. युवाओं में फैटी लिवर क्यों बढ़ रहा है? (मुख्य कारण)
पहले यह माना जाता था कि लिवर की बीमारियां या तो अत्यधिक शराब पीने वालों को होती हैं या फिर बुजुर्गों को। लेकिन अब नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD/MASLD) के मामले कम उम्र के लोगों में आम हो रहे हैं, जिसके प्रमुख कारण हैं:
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अनहेल्दी खान-पान: जंक फूड, फास्ट फूड, मैदे से बनी चीजें और कोल्ड ड्रिंक्स या पैकेटबंद जूस (Excess Sugar) का अत्यधिक सेवन।
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शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle): घंटों एक ही जगह बैठकर स्क्रीन के सामने काम करना, पढ़ाई करना और एक्सरसाइज या वॉक की कमी।
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मोटापा और पेट की चर्बी: शरीर का वजन बढ़ना, विशेष तौर पर पेट के आसपास फैट जमा होना (Abdominal Obesity)।
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तनाव और नींद की कमी: आधुनिक जीवनशैली का तनाव और रात में देर तक जागना, जिससे शरीर का मेटाबॉलिज्म और हॉर्मोनल संतुलन बिगड़ जाता है।
2. फैटी लिवर के शुरुआती लक्षण (साइलेंट डिजीज)
फैटी लिवर को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है क्योंकि शुरुआती चरणों में इसके लक्षण आसानी से समझ नहीं आते। हालांकि, शरीर कुछ संकेत दे सकता है जैसे:
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हर समय अत्यधिक थकान और कमजोरी महसूस होना।
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पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में हल्का दर्द या भारीपन।
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खाना खाने के बाद पेट फूलना या अपच की शिकायत।
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रूटीन ब्लड टेस्ट में लिवर एंजाइम (SGPT/SGOT) का बढ़ा हुआ आना।
3. सिरोसिस का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
यदि शुरुआती फैटी लिवर (जब लिवर में चर्बी जमा होती है) पर समय रहते ध्यान न दिया जाए, तो यह स्थिति आगे चलकर निम्नलिखित चरणों में बदल सकती है:
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सूजन (Steatohepatitis): लिवर कोशिकाओं में सूजन आने लगती है।
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फाइब्रोसिस (Fibrosis): सूजन के कारण लिवर के ऊतकों (Tissues) में घाव और कड़ापन आने लगता है।
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सिरोसिस (Cirrhosis): यह लिवर की बेहद गंभीर स्थिति है, जिसमें लिवर स्थायी रूप से डैमेज हो जाता है, उसकी कार्यक्षमता खत्म होने लगती है और यह लिवर कैंसर या लिवर फेलियर का कारण बन सकता है।
4. एक्सपर्ट्स की सलाह: बचाव और सुधार के उपाय
राहत की बात यह है कि शुरुआती चरण का फैटी लिवर पूरी तरह से रिवर्स (ठीक) किया जा सकता है। इसके लिए जीवनशैली में बदलाव करना सबसे बड़ा इलाज है:
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डाइट में सुधार करें: अपनी डाइट में हरी सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज और फाइबर युक्त चीजें शामिल करें। चीनी, रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और तली-भुनी चीजों से दूरी बनाएं।
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एक्टिव रहें: हफ्ते में कम से कम 150 मिनट (रोजाना 30 मिनट) एक्सरसाइज, ब्रिस्क वॉक, योग या साइकलिंग जरूर करें। बीच-बीच में वॉक के लिए उठें, लगातार घंटों न बैठें।
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वजन और शुगर कंट्रोल रखें: अपने वजन को नियंत्रित रखें और समय-समय पर ब्लड शुगर व कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाते रहें।
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नियमित जांच (Screening): यदि आप सिडेंट्री लाइफस्टाइल जी रहे हैं या परिवार में डायबिटीज/लिवर की समस्या का इतिहास है, तो साल में एक बार रुटीन हेल्थ चेकअप (जिसमें अल्ट्रासाउंड और LFT शामिल हो) जरूर कराएं।
राहत की बात यह है कि शुरुआती चरण का फैटी लिवर पूरी तरह से रिवर्स यानी ठीक किया जा सकता है, जिसके लिए डॉक्टरों ने जीवनशैली में बदलाव को सबसे बड़ा इलाज बताया है। युवाओं को अपनी डाइट में हरी सब्जियों, ताजे फलों, साबुत अनाज और फाइबर युक्त आहार को प्राथमिकता देनी चाहिए तथा रिफाइंड शुगर व तली-भुनी चीजों से तौबा करनी चाहिए। साथ ही, हफ्ते में कम से कम 150 मिनट व्यायाम या योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है।

