अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में उस समय भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला, जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक उच्चस्तरीय राजकीय यात्रा पर वहां पहुंचे। इस दौरान व्हाइट हाउस और चीनी दूतावास के बाहर विभिन्न प्रवासी समूहों ने चीन सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और शी जिनपिंग की यात्रा का पुरजोर विरोध किया।
इस विरोध प्रदर्शन में तिब्बती, उइगर, हांगकांग के लोकतंत्र समर्थक, ताइवान के प्रतिनिधि और चीनी असंतुष्ट नागरिक एक मंच पर एकजुट हुए। इन सभी ने मिलकर चीन की कम्युनिस्ट सरकार और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के खिलाफ नारेबाजी की, जिससे राजधानी का राजनीतिक माहौल काफी गर्मा गया।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में “फ्री तिब्बत”, “फ्री हॉन्ग-कॉन्ग”, और “शी जिनपिंग, यू आर नॉट वेलकम” लिखे हुए बैनर और तख्तियां थाम रखी थीं। इसके साथ ही, प्रदर्शन के दौरान आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा के बड़े-बड़े पोस्टर भी लहराए गए, जो तिब्बतियों के संघर्ष और उनकी आस्था का प्रतीक बने।
इस आंदोलन के दौरान उइगर मुसलमानों और दक्षिणी मंगोलियाई कार्यकर्ताओं ने भी चीन में मानवाधिकारों के हनन का कड़ा विरोध किया। उन्होंने शिनजियांग प्रांत और अन्य क्षेत्रों में दमनकारी नीतियों को तुरंत बंद करने की अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की।
प्रदर्शनकारियों ने मुख्य रूप से चीन सरकार से तिब्बत में धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता बहाल करने की मांग की। इसके अलावा, 11वें पंचेन लामा सहित चीन की जेलों में बंद सभी राजनीतिक कैदियों की तत्काल रिहाई और तिब्बत के प्रतिनिधियों के साथ बिना शर्त बातचीत शुरू करने की पुरजोर मांग उठाई गई।
चीनी राष्ट्रपति की इस यात्रा के दौरान सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम किए गए थे। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस ने व्हाइट हाउस, कैपिटल हिल और चीनी दूतावास के आसपास सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया था, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
इन कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच भी प्रदर्शनकारियों ने तय रूटों पर मार्च निकाला और चीन के खिलाफ अपना आक्रोश खुलकर व्यक्त किया। यह विरोध प्रदर्शन एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चीन की आंतरिक नीतियों और मानवाधिकार के मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ले आया है।

