मंत्रालय महानदी भवन में आज मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में राज्य जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन एजेंसी की शासी परिषद की नवमीं बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश में जलग्रहण क्षेत्र प्रबंधन से जुड़े सभी कार्य भारत सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही संचालित किए जाएं।
बैठक में मुख्य रूप से भूमिगत जलसंग्रहण के कार्यों को अधिक से अधिक संख्या में कराने पर बल दिया गया। इसके अलावा, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के जलग्रहण क्षेत्र विकास कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक हुए कार्यों की प्रगति की समीक्षा की गई और वाटरशेड विकास कार्यक्रम- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 3.0 के प्रारंभिक प्रतिवेदन प्रस्ताव व क्षेत्रफल अनुमोदन पर विस्तार से चर्चा हुई।

ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए परियोजनाओं में आजीविका गतिविधियों को बड़े पैमाने पर शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत डेयरी, मुर्गीपालन, मत्स्य पालन, बकरी पालन, शुकर पालन, बत्तख पालन, मधुमक्खी पालन, ड्रिप, स्प्रिंकलर, पंप मोटर, अगरबत्ती उत्पादन, सब्जी उत्पादन, आटा चक्की, दाल और मसाला पिसाई जैसी विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि चेकडेम, स्टापडेम, कुआं, फार्म पॉण्ड, अर्दन डेम, सिंचाई तालाब, डबरी, वृक्षारोपण तथा मृदा एवं नमी संरक्षण जैसी संरचनाओं के निर्माण से प्रदेश में अतिरिक्त सिंचाई रकबे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे राज्य के किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।
इस उच्चस्तरीय बैठक में पीसीसीएफ श्री अरूण पाण्डेय, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव श्री सिद्धार्थ कोमल परदेशी सहित वित्त, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, वन विभाग, ग्रामीण आजीविका मिशन, नाबार्ड, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी एवं शासी परिषद के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

