कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (KTU) में छात्रों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब बुनियादी सुविधाओं के अभाव से तंग आकर उन्होंने प्रशासनिक भवन के सामने अनोखा प्रदर्शन शुरू कर दिया। हाथों में कुकर, कढ़ाई, थाली और पत्तल लेकर पहुंचे विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी समस्याओं के तत्काल समाधान की मांग की।
छात्रों का मुख्य आरोप है कि हॉस्टल में लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं का भारी टोटा है, लेकिन कई बार शिकायत करने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। मजबूरी में छात्रों को अपनी इन बुनियादी और जरूरी मांगों को मनवाने के लिए इस अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन का रास्ता चुनना पड़ा।
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने सबसे गंभीर आरोप पीने के पानी को लेकर लगाया है। विद्यार्थियों का कहना है कि हॉस्टल में सप्लाई होने वाले पीने के पानी में लगातार कीड़े निकल रहे हैं, जिससे छात्रों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। इसके अलावा, वाटर कूलर और शुद्ध पेयजल जैसी सामान्य सुविधाएं न मिलने के कारण उन्हें आए दिन भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्वच्छता और रख-रखाव के मोर्चे पर भी हॉस्टल की स्थिति बेहद दयनीय बनी हुई है। छात्रों ने बताया कि पिछले करीब एक महीने से हॉस्टल में सफाई कर्मचारी नहीं आ रहे हैं, जिसके चलते परिसर में गंदगी का अंबार लग गया है और छात्रों से दबावपूर्वक खुद झाड़ू लगवाया जा रहा है।
इन्हीं समस्याओं के बीच, बारिश के मौसम में हॉस्टल की बदहाली और बढ़ जाती है। छात्रों के अनुसार, बारिश के दौरान छात्रावास की छत से लगातार पानी टपकता है जिससे कमरों के अंदर पानी भर जाता है। इसके साथ ही, हॉस्टल के टूटे हुए दरवाजे और गंदी पानी की टंकियां भी छात्रों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई हैं, जिन्हें तुरंत बदलने की मांग की जा रही है।
इस पूरे घटनाक्रम का एक और चिंताजनक पहलू छात्रों द्वारा प्रशासन पर लगाया गया दमनकारी आरोप है। विद्यार्थियों का कहना है कि जब वे अपनी इन जायज समस्याओं को विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखते हैं, तो उनकी सुनवाई करने के बजाय उन पर दबाव बनाने और डराने-धमकाने का प्रयास किया जाता है।
अपनी 5 सूत्रीय मांगों को लेकर कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रशासनिक भवन के गेट पर डटे छात्रों ने साफ कर दिया है कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन लिखित रूप में उनकी सभी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं करता, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा।

