रायपुर : रक्षाबंधन का पावन पर्व भाई-बहन के अटूट स्नेह का प्रतीक होने के साथ-साथ इस वर्ष छत्तीसगढ़ की महिलाओं के लिए आर्थिक संबल और आत्मनिर्भरता की एक नई सौगात लेकर आया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित महत्वाकांक्षी ‘महतारी वंदन योजना’ की 30वीं किस्त रक्षाबंधन के ठीक पहले महिलाओं के खातों में पहुंच गई, जिससे प्रदेशभर की बहनों की त्योहार की खुशियों में चार चांद लग गए।
इस नियमित आर्थिक सहायता के मिलने से महिलाओं में एक नया आत्मविश्वास देखने को मिला है। बलरामपुर जिले की निवासी ज्योति सोनी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बताया कि उनके ‘विष्णु भैया’ ने रक्षाबंधन से पहले खाते में एक हजार रुपये भेजकर उनकी खुशियों को दोगुना कर दिया है। इस राशि से उन्होंने न केवल भाई के लिए राखी और मिठाई खरीदी, बल्कि अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में भी नियमित बचत शुरू कर दी है।
महिलाओं ने इस सौगात की सराहना की है। उनका कहना है कि आज के दौर में बढ़ती महंगाई के बीच त्योहारों की व्यवस्था करना कई बार कठिन हो जाता है, लेकिन महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि ने उन्हें अपनी सामर्थ्य के अनुसार खरीदारी करने और परिवार की छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने की पूरी आजादी दी है।
केवल प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि ग्रामीण स्तर पर महिलाएं स्व-रोजगार की अनूठी मिसाल भी पेश कर रही हैं। बलरामपुर जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े ‘लक्ष्मी समूह’ की महिलाओं ने इस बार धान, गेहूं और मक्का जैसे स्थानीय कृषि उत्पादों का रचनात्मक इस्तेमाल कर बेहद आकर्षक और अनूठी राखियां तैयार की हैं।
इन स्व-सहायता समूहों की दीदियों द्वारा अब तक लगभग 7,020 राखियां बनाई जा चुकी हैं, जिनकी बिक्री से लगभग 60 हजार रुपये तक की शानदार आय प्राप्त हो चुकी है। इन खूबसूरत और पर्यावरण-अनुकूल राखियों की मांग बाजार में लगातार बनी हुई है, जिन्हें सी-मार्ट (C-Mart) के साथ-साथ संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में लगाए गए विशेष स्टॉल के जरिए आम जनता तक पहुंचाया जा रहा है।
महतारी वंदन योजना की राशि और महिला समूहों के हुनर का यह अनूठा संगम यह साबित करता है कि स्थानीय संसाधनों को बढ़ावा देकर कैसे ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया जा सकता है। यह पहल महतारी वंदन के वित्तीय संबल और मातृशक्ति के स्वरोजगार का एक बेहतरीन समन्वय प्रस्तुत करती है।
संक्षेप में कहा जाए तो इस वर्ष छत्तीसगढ़ में रक्षाबंधन का यह पर्व केवल भाई की कलाई पर बंधने वाले प्रेम के धागे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह प्रदेश की महिलाओं के स्वाभिमान, आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता का एक ऐसा जीवंत प्रतीक बन गया है, जो राज्य सरकार के सशक्त प्रयासों से निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

