तमिलनाडु की राजनीति में दशकों पुराने द्रविड़ किलों को ढहाते हुए तमिलगा वेट्री कड़गम (TVK) के प्रमुख और सुपरस्टार विजय ने सत्ता की ओर मजबूत कदम बढ़ा दिए हैं। विजय ने लोक भवन और राजभवन पहुंचकर राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की और औपचारिक रूप से सरकार बनाने का दावा पेश किया। इस ऐतिहासिक मौके पर उनके साथ पार्टी के कई दिग्गज नेता जैसे एन. आनंद, आधव अर्जुना और सेंगोट्टैयन मौजूद रहे। विजय के इस कदम ने राज्य की राजनीति में DMK और AIADMK के वर्चस्व को सीधी चुनौती दी है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, विजय 7 मई को सुबह 10:00 से 11:15 बजे के बीच मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। हालांकि, मंत्रिमंडल में उनके साथ और कौन-कौन से चेहरे शामिल होंगे, इसे लेकर अभी सस्पेंस बना हुआ है। टीवीके खेमे में उत्साह का माहौल है और शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां जोरों पर हैं। विजय की यह जीत विशेष रूप से युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच उनकी जबरदस्त लोकप्रियता का परिणाम मानी जा रही है।
सरकार बनाने के समीकरणों की बात करें तो टीवीके को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का साथ मिल गया है। कांग्रेस के समर्थन के बाद ही विजय ने राज्यपाल के सामने बहुमत का दावा पेश करने का फैसला किया। इसके साथ ही, टीवीके नेतृत्व ने विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल से दो हफ्ते का समय मांगा है। यह समय गठबंधन के साथियों को एकजुट रखने और निर्दलीयों को साथ लाने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 है। विजय की पार्टी TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन वे अभी भी बहुमत से 10 सीट दूर हैं। इस गैप को भरने के लिए अब जोड़-तोड़ की राजनीति तेज हो गई है। ऐसे में सबकी निगाहें विपक्षी खेमे की हलचल पर टिकी हैं, जहां सत्ता के समीकरण हर पल बदल रहे हैं।
इसी बीच, मुख्य विपक्षी पार्टी AIADMK में बड़ी फूट के संकेत मिल रहे हैं। भाजपा की सहयोगी होने के बावजूद AIADMK के कई विधायक विजय को समर्थन देने के पक्ष में दिख रहे हैं। वरिष्ठ नेता सी.वी. षणमुगम के नेतृत्व में विधायकों का एक गुट बगावत पर उतर आया है, जिससे पार्टी दो फाड़ होती नजर आ रही है। रिपोर्टों के अनुसार, 47 विधायकों में से 30 से अधिक विधायक पार्टी नेतृत्व के खिलाफ जाकर टीवीके को सपोर्ट कर सकते हैं।
बागी गुट ने पूर्व मुख्यमंत्री और सीनियर लीडर एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने जल्द ही विजय को समर्थन देने का फैसला नहीं लिया, तो वे पार्टी तोड़ देंगे। सी.वी. षणमुगम के आवास पर विधायकों की लगातार बैठकें हो रही हैं। यदि यह बगावत सफल होती है, तो विजय के लिए बहुमत का आंकड़ा पार करना बेहद आसान हो जाएगा और राज्य में एक नई राजनीतिक शक्ति का उदय होगा।
दूसरी ओर, उत्तर-पूर्व के राज्य असम से भी बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को अपने मंत्रिमंडल के साथ राज्यपाल को इस्तीफा सौंप दिया है। यह इस्तीफा नई सरकार के गठन की संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है। राज्यपाल ने उनका इस्तीफा स्वीकार करते हुए उन्हें अगली सरकार के कार्यभार संभालने तक ‘कार्यवाहक मुख्यमंत्री’ बने रहने का निर्देश दिया है।
कुल मिलाकर, दक्षिण से लेकर उत्तर-पूर्व तक भारत का राजनीतिक नक्शा बदलता दिख रहा है। जहां असम में भाजपा अपनी पकड़ मजबूत बनाए हुए है, वहीं तमिलनाडु में फिल्मी पर्दे से राजनीति के पटल पर आए विजय एक नए नायक के रूप में उभर रहे हैं। आने वाले कुछ दिन इन दोनों राज्यों की भविष्य की दिशा तय करने में अत्यंत निर्णायक साबित होंगे।

