मुंबई कस्टम्स ज़ोन-III के एयरपोर्ट कमिश्नरेट ने तस्करी के खिलाफ अपनी मुहिम को तेज करते हुए बीते दो दिनों में बड़ी सफलता हासिल की है। सतर्क अधिकारियों ने मुस्तैदी दिखाते हुए तस्करी के कई मामलों का भंडाफोड़ किया, जिसमें सोना, महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और विदेशी सिगरेट शामिल हैं। विभाग के अनुसार, जब्त किए गए सामान की कुल कीमत लाखों रुपये आंकी गई है।
यह पूरी कार्रवाई स्पॉट इंटेलिजेंस और एडवांस पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (APIS) प्रोफाइलिंग के आधार पर की गई। कस्टम्स विभाग को संदिग्ध गतिविधियों की गुप्त सूचना मिली थी, जिसके बाद संदिग्ध उड़ानों और यात्रियों पर पैनी नजर रखी जा रही थी। तकनीक और मानवीय समझ के सटीक तालमेल की वजह से ही तस्करों के मंसूबों को नाकाम किया जा सका।
दुबई से आए दो अलग-अलग यात्रियों के पास से भारी मात्रा में अवैध सामान बरामद किया गया। ये यात्री एमिरेट्स की फ्लाइट EK-502 से मुंबई पहुंचे थे। तलाशी के दौरान उनके पास से इलेक्ट्रॉनिक आइटम, महंगे कॉस्मेटिक उत्पाद और विदेशी सिगरेट के पैकेट मिले। इन दोनों मामलों में जब्त किए गए सामान की कुल बाजार कीमत 84.37 लाख रुपये बताई जा रही है।
एक अन्य मामले में कस्टम्स अधिकारियों ने विमान के भीतर ही तस्करी का अनूठा तरीका पकड़ा। फ्लाइट की गहन तलाशी यानी ‘रमेजिंग’ के दौरान विमान के पिछले हिस्से में स्थित दोनों शौचालयों की जांच की गई। वहां कमोड के नीचे भूरे रंग के टेप में लिपटे हुए आठ संदिग्ध पैकेट बरामद हुए। तस्करों ने इन्हें बहुत ही चालाकी से छिपाया था ताकि लैंडिंग के बाद इन्हें सुरक्षित निकाला जा सके।
सोने की तस्करी के एक अन्य गंभीर मामले में दुबई से स्पाइसजेट की फ्लाइट OSG-5114 से आए एक यात्री को रोका गया। संदेह होने पर जब यात्री की सघन तलाशी ली गई, तो उसके पास से 695 ग्राम 24 कैरेट कच्चा सोना बरामद हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस सोने की कीमत लगभग 95.32 लाख रुपये आंकी गई है। यात्री ने इसे छिपाकर ले जाने की कोशिश की थी।
सोने की बरामदगी के बाद संबंधित यात्री को हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ के दौरान वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका, जिसके बाद उसे कस्टम्स एक्ट, 1962 की सुसंगत धाराओं के तहत औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया गया। विभाग अब यात्री के पिछले रिकॉर्ड और उसके विदेशी संपर्कों की बारीकी से जांच कर रहा है।
कस्टम्स विभाग का मानना है कि इन घटनाओं के पीछे एक संगठित स्मगलिंग नेटवर्क काम कर रहा है। पकड़े गए यात्री महज ‘कूरियर’ हो सकते हैं, जिनका इस्तेमाल मुख्य सरगनाओं द्वारा किया जाता है। फिलहाल विभाग तस्करी के इस जाल (रैकेट) से जुड़े अन्य संभावित साथियों और मास्टरमाइंड का पता लगाने के लिए आगे की जांच में जुटा है।
मुंबई एयरपोर्ट पर सुरक्षा और निगरानी को अब पहले से कहीं अधिक कड़ा कर दिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अवैध गतिविधियों और तस्करी को रोकने के लिए जीरो-टोलरेंस की नीति अपनाई जाएगी। आने वाले दिनों में और भी बड़ी गिरफ्तारियां और खुलासे होने की संभावना है।

