नंदुरबार (महाराष्ट्र) से प्राप्त समाचार के अनुसार, राज्य में बर्ड फ्लू (एवियन इन्फ्लुएंजा) का प्रकोप एक बार फिर चिंताजनक स्थिति में पहुंच गया है। नवापुर तहसील के पोल्ट्री फार्मों में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने बेहद कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। वर्तमान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने लगभग 1.40 लाख मुर्गियों को वैज्ञानिक तरीके से मारने (कलिंग) का आदेश जारी किया है, ताकि वायरस के प्रसार को समय रहते रोका जा सके।
नंदुरबार की कलेक्टर मित्ताली सेठी ने संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए त्रिस्तरीय सुरक्षा घेरा तैयार किया है। इसके तहत संक्रमित क्षेत्र के चारों ओर 3 किलोमीटर का कंटेनमेंट जोन और 5 किलोमीटर का बफर जोन घोषित किया गया है। इन क्षेत्रों में पक्षियों की आवाजाही और बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके अलावा, संक्रमण के केंद्र से 1 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी 6 पोल्ट्री फार्मों को सील कर दिया गया है, जहाँ आज से मुर्गियों को नष्ट करने का अभियान शुरू होगा।
स्वास्थ्य विभाग और पशुपालन विभाग की टीमें इस अभियान को अंजाम देने के लिए तैनात की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया निर्धारित वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के तहत पूरी की जाएगी ताकि पर्यावरण या मानव स्वास्थ्य को कोई खतरा न हो। नवापुर क्षेत्र में लगभग 10 लाख मुर्गियां हैं, जिसे देखते हुए यह खतरा और भी बड़ा हो जाता है। यदि समय पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह संक्रमण पड़ोसी राज्य गुजरात के सीमावर्ती इलाकों में भी फैल सकता है।

पोल्ट्री उद्योग से जुड़े व्यापारियों और किसानों के लिए यह आर्थिक रूप से एक बड़ी मार है। शासन ने भरोसा दिलाया है कि जिन फार्मों की मुर्गियों को नष्ट किया जा रहा है, उनका पूरा डेटा तैयार कर राज्य सरकार को भेजा जाएगा। नियमों के अनुसार प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा और वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही प्रशासन ने चेतावनी दी है कि जिन फार्म संचालकों ने जैव-सुरक्षा (Bio-safety) नियमों में लापरवाही बरती है, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो नवापुर बर्ड फ्लू के प्रति बेहद संवेदनशील रहा है। इससे पहले साल 2006 और 2021 में भी यहां बड़े पैमाने पर संक्रमण फैला था, जिसके कारण लाखों मुर्गियों और अंडों को नष्ट करना पड़ा था। बार-बार होने वाले इस प्रकोप ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रवासी पक्षियों के आगमन और पोल्ट्री प्रबंधन में चूक इस तरह के संक्रमण के मुख्य कारण हो सकते हैं।
आम जनता की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने पूरे राज्य में अलर्ट जारी किया है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे मृत पक्षियों या बीमार मुर्गियों के सीधे संपर्क में आने से बचें। अंडे और चिकन की खपत को लेकर भी सरकारी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिसमें इन्हें पूरी तरह पकाकर खाने या विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। सभी जिलों के चिकित्सा अधिकारियों को संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की प्राथमिकता अब इस वायरस की चेन को तोड़ना है। नवापुर के प्रभावित इलाकों में सैनिटाइजेशन और कीटाणुशोधन का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। साथ ही, आस-पास के गांवों में घर-घर जाकर सर्वेक्षण किया जा रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संक्रमण इंसानों तक न पहुंचे। आगामी कुछ दिन नवापुर और महाराष्ट्र के पोल्ट्री उद्योग के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।

