छत्तीसगढ़ में गर्मी के तेवर अब जानलेवा होने लगे हैं। मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहा, जिससे तापमान में भारी उछाल दर्ज किया गया है। राजनांदगांव प्रदेश का सबसे गर्म इलाका रहा, जहाँ पारा 43.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया। वहीं, दूसरी ओर अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 19.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो फिलहाल प्रदेश में सबसे कम है। शुष्क हवाओं के कारण मैदानी इलाकों में तपिश काफी बढ़ गई है।
मौसम विशेषज्ञ एचपी चंद्रा के मुताबिक, इस समय एक साथ कई मौसम प्रणालियाँ सक्रिय हैं। उत्तर पूर्व मध्य प्रदेश के ऊपर एक चक्रवाती घेरा बना हुआ है, जबकि एक द्रोणिका राजस्थान से लेकर मणिपुर तक फैली हुई है। इसके अतिरिक्त, एक अन्य द्रोणिका मध्य प्रदेश से मन्नार की खाड़ी तक विस्तृत है और कर्नाटक-महाराष्ट्र के ऊपर प्रति-चक्रवात बना हुआ है। इन जटिल प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव के कारण प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में गर्म हवाओं का प्रवाह बना रहेगा, जिससे राहत की उम्मीद फिलहाल कम ही है।
राजधानी रायपुर की बात करें तो यहाँ आज का दिन बेहद कष्टकारी रहने वाला है। मौसम विभाग ने शहर में ‘ग्रीष्म लहर’ यानी लू (Heat Wave) चलने की स्पष्ट चेतावनी जारी की है। आज रायपुर का अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। चिंताजनक बात यह है कि न्यूनतम तापमान भी 27 डिग्री सेल्सियस तक रहने की संभावना है, जिसका अर्थ है कि राजधानी वासियों को केवल दिन में ही नहीं, बल्कि रात के समय भी भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ेगा।
प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी मौसम का मिजाज मिला-जुला लेकिन गर्म रहेगा। जहाँ मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ पॉकेट्स में हीट वेव की स्थिति बनी रहेगी, वहीं बस्तर संभाग के कुछ जिलों में स्थानीय प्रभावों के कारण गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है। हालांकि, इन बौछारों से तापमान में कोई बड़ी गिरावट आने के संकेत नहीं हैं, बल्कि नमी बढ़ने से उमस में और इजाफा हो सकता है।
बढ़ते तापमान और लू के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच घर से बाहर निकलने पर पाबंदी रखने और शरीर में पानी की कमी न होने देने का आग्रह किया गया है। आने वाले एक-दो दिनों में अधिकतम तापमान में मामूली वृद्धि की संभावना है, जिससे स्पष्ट है कि फिलहाल छत्तीसगढ़ को सूर्य देव के कड़े तेवरों से निजात नहीं मिलने वाली है।

