रायपुर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने और शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई देने के लिए शासन ने रिंग रोड-5 के निर्माण की तैयारी तेज कर दी है। लगभग 11 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट के लिए सरकार ने 694 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया है। इस नई सड़क के बन जाने से रायपुर की जनता को जाम की पुरानी समस्या से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, साथ ही शहर के बाहरी इलाकों का विकास भी तेजी से होगा।
यह रिंग रोड मुख्य रूप से चंदनीडीह से शुरू होकर महादेवघाट और खारुन नदी के किनारे होते हुए पुराना धमतरी रोड स्थित खिलोरा तक जाएगी। वर्तमान में इस रूट के अभाव में लोगों को लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। प्रोजेक्ट को सुव्यवस्थित रूप से पूरा करने के लिए इसे दो चरणों में बांटा गया है, जिससे निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक प्रबंधन में आसानी हो सके।
पहले चरण के अंतर्गत चंदनीडीह से भाठागांव तक लगभग 7.5 किलोमीटर सड़क का निर्माण और चौड़ीकरण किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में भाठागांव से खारुन नदी की दिशा में शेष 3.5 किलोमीटर का हिस्सा तैयार होगा। इस पूरे प्रोजेक्ट का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा चंदनीडीह रेलवे क्रॉसिंग पर बनने वाला ओवरब्रिज है, जिसकी लागत करीब 110 करोड़ रुपए आंकी गई है।
रायपुर नगर निगम और लोक निर्माण विभाग (PWD) इस प्रोजेक्ट को लेकर आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। निगम आयुक्त और PWD के मुख्य अभियंता के अनुसार, बजट को मंजूरी मिल चुकी है और वर्तमान में सर्वे का काम युद्ध स्तर पर जारी है। इस प्रक्रिया में भूमि अधिग्रहण का कार्य भी शामिल है, जिसके लिए जल्द ही प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि रिंग रोड-1 अब शहर के भीतर समा चुका है और वह आउटर रोड नहीं रह गया है। ऐसे में रिंग रोड-5 का निर्माण समय की मांग है। यह नई सड़क दुर्ग, भिलाई और राजनांदगांव की ओर से आने वाले यात्रियों को एयरपोर्ट और नवा रायपुर तक सीधी और सुगम कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिससे उन्हें शहर के भीतर के ट्रैफिक में फंसने की जरूरत नहीं होगी।
इस मार्ग के बनने से सबसे बड़ी राहत संतोषी नगर चौक और टाटीबंध जैसे व्यस्त इलाकों को मिलेगी। वर्तमान में खिलोरा से चंदनीडीह पहुंचने में लोगों को करीब 23 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है, जिसमें भारी जाम के कारण एक घंटे से अधिक का समय बर्बाद होता है। नई रिंग रोड इस दूरी और समय को आधा कर देगी, जिससे रोजाना एक लाख से अधिक राहगीरों को फायदा होगा।
प्रोजेक्ट की भविष्य की योजना इसे फुंडहर चौक एक्सप्रेस-वे से जोड़ने की है। यदि ऐसा होता है, तो दुर्ग से एयरपोर्ट तक का सफर पूरी तरह सिग्नल-फ्री हो जाएगा। जानकारों का सुझाव है कि इसे ‘एक्सेस कंट्रोल एक्सप्रेस-वे’ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में गाड़ियों की बढ़ती संख्या के बावजूद ट्रैफिक की गति धीमी न पड़े।
कुल मिलाकर, रिंग रोड-5 न केवल रायपुर की लाइफलाइन बनेगी, बल्कि यह सेजबहार, बोरियाकला और काठाडीह जैसे क्षेत्रों के लिए आर्थिक विकास के नए द्वार भी खोलेगी। बेहतर रोड इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ रायपुर अब एक आधुनिक महानगर की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जहां सुगम यातायात और तेज कनेक्टिविटी प्राथमिकता पर है।

