छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में कांच की बोतलों (शीशी) के व्यापार से जुड़े प्रदेशभर के व्यापारी एक बड़े संकट के खिलाफ लामबंद हो गए हैं। राज्य सरकार द्वारा शराब की बिक्री के लिए कांच की जगह प्लास्टिक बोतलों के उपयोग के फैसले ने व्यापारियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस विरोध को धार देने के लिए पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर सामने आए हैं। उनके नेतृत्व में व्यापारियों का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर इस नीति पर पुनर्विचार करने की मांग करेगा।
पूर्व गृह मंत्री ननकीराम कंवर ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि प्लास्टिक में शराब बेचना किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि यह न केवल उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि इससे जुड़े हजारों व्यापारियों के हितों पर भी सीधा प्रहार है। व्यापारियों का कहना है कि कांच की तुलना में प्लास्टिक की बोतलों में शराब की गुणवत्ता और सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिसे सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए।
व्यापारियों के अनुसार, शराब बनाने वाली कंपनियों और वेयरहाउस ने पिछले 10 दिनों से अचानक कांच की बोतलों की खरीदी बंद कर दी है। व्यापारी आमिन मुगल और राम प्रकाश ने बताया कि उनके पास वर्तमान में लाखों-करोड़ों रुपये की बोतलों का स्टॉक पड़ा हुआ है। बिना किसी पूर्व सूचना के खरीदी बंद होने से उनका पूरा निवेश फंस गया है और व्यापार पूरी तरह से ठप हो गया है। यदि यह स्थिति जारी रही, तो कई व्यापारियों के सामने दिवालिया होने की नौबत आ सकती है।
आर्थिक नुकसान के साथ-साथ यह मामला अब एक बड़े सामाजिक संकट का रूप ले रहा है। व्यापारियों का दावा है कि कांच की बोतलों के संग्रह, धुलाई और आपूर्ति की चेन से प्रदेश के करीब 15 लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। अचानक लिए गए इस फैसले से इन सभी लोगों के रोजगार पर तलवार लटक गई है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी रोजी-रोटी की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो प्रदेश में बेरोजगारी का एक भयावह मंजर देखने को मिल सकता है।
अंततः, व्यापारियों की मांग केवल इतनी है कि सरकार उनके पुराने स्टॉक को खपाने की अनुमति दे और कांच की बोतलों की खरीदी फिर से शुरू की जाए। उनका कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन किसी भी नई नीति को लागू करने से पहले उससे जुड़े छोटे और मध्यम दर्जे के व्यापारियों के हितों का ध्यान रखा जाना अनिवार्य है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद सरकार इस दिशा में क्या राहतकारी कदम उठाती है।

