रायपुर, 09 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के किसानों और आम नागरिकों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य की 12 वृहद और 34 मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में इस वर्ष जल भराव की स्थिति पिछले वर्षों के मुकाबले काफी बेहतर दर्ज की गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में राज्य के कुल 46 प्रमुख सिंचाई जलाशयों में औसत रूप से 67.43 प्रतिशत जल भराव है। यह आंकड़ा वर्ष 2025 की इसी अवधि (45.23%) और वर्ष 2024 (42%) की तुलना में काफी अधिक है, जिसे बेहतर मानसून और प्रभावी जल प्रबंधन का परिणाम माना जा रहा है।
वृहद सिंचाई परियोजनाओं की बात करें तो इनमें वर्तमान में औसत 68.19 प्रतिशत जल भराव है। प्रमुख जलाशयों में मनियारी (90.41%), मुरूमसिल्ली (86.85%), और खारंग (84.99%) जल भराव के साथ शीर्ष पर हैं। इसी तरह दुधावा और रविशंकर सागर जैसे महत्वपूर्ण बांधों में भी 75 प्रतिशत से अधिक पानी उपलब्ध है। हालांकि, कोडार जलाशय में स्थिति थोड़ी चिंताजनक है, जहां केवल 35.45 प्रतिशत जल ही संचित हो पाया है, लेकिन शेष प्रमुख बांधों की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है।
मध्यम सिंचाई परियोजनाओं में भी इस साल जल स्तर ने लंबी छलांग लगाई है। राज्य की 34 मध्यम परियोजनाओं में औसत जल भराव 63.38 प्रतिशत है, जो पिछले साल के 44.62 प्रतिशत से कहीं ज्यादा है। इनमें खपरी जलाशय 92.98 प्रतिशत और छिरपानी 92.23 प्रतिशत भराव के साथ लगभग अपनी पूर्ण क्षमता के करीब हैं। इनके अलावा पिपरिया नाला, गोंडली और सुतियापाट जैसे जलाशयों में भी भरपूर पानी उपलब्ध है, जो आने वाले गर्मी के महीनों के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा।
प्रदेश सरकार ने उपलब्ध जल का उचित वितरण सुनिश्चित करने के लिए चरणबद्ध योजना लागू की है। रबी की फसलों की अंतिम सिंचाई और ग्रीष्मकालीन फसलों के लिए गंगरेल (रविशंकर सागर), दुधावा और सोंढूर जैसी परियोजनाओं से नहरों के माध्यम से नियंत्रित पानी छोड़ा जा रहा है। कोडार जलाशय से भी 6.84 क्यूमेक्स की दर से पानी का प्रवाह जारी है, ताकि धमतरी और रायपुर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में निस्तारी और सिंचाई की जरूरतों को समय पर पूरा किया जा सके।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस स्थिति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने जल संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर जोर देते हुए बताया कि जलाशयों में यह बेहतर जल भराव समन्वित प्रयासों का ही फल है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि हमारा मुख्य लक्ष्य कृषि उत्पादन में वृद्धि करना और किसानों की आय बढ़ाना है, जिसके लिए पर्याप्त सिंचाई जल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
प्रशासनिक स्तर पर भी जल भराव की सतत निगरानी की जा रही है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि नहरों और स्लुइस गेट के माध्यम से पानी का सदुपयोग किया जाए ताकि अंतिम छोर तक के किसान को लाभ मिल सके। खरखरा, सारोदा और जुमका जैसे जलाशयों से भी आवश्यकतानुसार जल वितरण किया जा रहा है, जिससे न केवल फसलों को जीवनदान मिल रहा है, बल्कि पेयजल और निस्तारी की समस्या का भी प्रभावी समाधान हो रहा है।

