छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने रासायनिक उर्वरकों की कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि गड़बड़ी पाए जाने पर दोषियों को सीधे जेल भेजा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए राज्य सरकार पूरी तरह सजग है और खाद की किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। पश्चिमी एशिया के मौजूदा संकट से उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं को खारिज करते हुए मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के भ्रम या ‘पैनिक’ की स्थिति में न आएं, क्योंकि सरकार ने आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं।
खरीफ 2026 की तैयारियों को लेकर आयोजित इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नियमित और आकस्मिक निरीक्षण करें। विशेष रूप से राज्य के दूरस्थ अंचलों में उर्वरकों के अग्रिम भंडारण को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि ऐन वक्त पर किसानों को भटकना न पड़े। पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार डीएपी के स्थान पर एनपीके, एसएसपी और अन्य वैकल्पिक उर्वरकों सहित जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई गई है।
किसानों को आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने के लिए प्रदेश में आगामी 5 मई से 20 मई तक “विकसित भारत संकल्प अभियान” चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत कृषि वैज्ञानिकों और अधिकारियों की टीमें गांव-गांव जाकर किसानों से सीधा संवाद करेंगी। इस दौरान केवल जागरूकता ही नहीं फैलाई जाएगी, बल्कि मौके पर ही किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस अभियान में पशुपालन, मछली पालन और उद्यानिकी विभाग के विशेषज्ञ भी एक साझा मंच पर मौजूद रहेंगे।
बैठक में डिजिटल सशक्तिकरण पर जोर देते हुए मंत्री ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर एग्रीस्टैक पोर्टल पर शेष बचे किसानों का पंजीकरण पूर्ण करने का अल्टीमेटम दिया है। फार्मर आईडी बनने से कोई भी पात्र किसान पी.एम. किसान सम्मान निधि जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहेगा। इसके साथ ही पी.एम. आशा योजना की समीक्षा करते हुए धमतरी जिले के बेहतर प्रदर्शन की सराहना की गई, जबकि अन्य जिलों को मार्कफेड और नाफेड के साथ समन्वय कर दलहन-तिलहन की खरीदी में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
कृषि मंत्री ने राज्य में फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को भविष्य की जरूरत बताया। उन्होंने रायपुर और दुर्ग संभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे ग्रीष्मकालीन धान के रकबे को कम करने के लिए प्रयास करें और किसानों को मक्का, दलहन तथा तिलहन की फसलों की ओर प्रोत्साहित करें। इससे न केवल जमीन की उर्वरता बनी रहेगी बल्कि किसानों की लागत में कमी और आय में वृद्धि होगी। धमतरी जिले में इस दिशा में हुए सकारात्मक बदलावों को रोल मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया।
अंत में, नवाचारों पर चर्चा करते हुए उद्यानिकी विभाग को जल निकायों (Water Bodies) में मखाना और सिंघाड़े की खेती के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। मंत्री श्री नेताम ने कहा कि मखाना की खेती के साथ मछली पालन को जोड़कर किसान अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं। इस उच्च स्तरीय बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती शहला निगार सहित विभिन्न विभागों के संचालक और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का रोडमैप साझा किया।

