नई दिल्ली/रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर बस्तर के कायाकल्प की एक ऐतिहासिक रूपरेखा प्रस्तुत की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि बस्तर अब नक्सलवाद के काले साये से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। उन्होंने केंद्र सरकार के सहयोग के लिए आभार जताते हुए स्पष्ट किया कि अब बस्तर में गोलियों की गूंज नहीं, बल्कि विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री ने इसे एक ‘नया बस्तर’ करार दिया जहाँ अब शांति और विश्वास का वातावरण स्थापित है।
मुख्यमंत्री ने मुलाकात के दौरान बस्तर के समग्र विकास के लिए तैयार किया गया एक दूरदर्शी ब्लूप्रिंट प्रधानमंत्री को सौंपा। यह दस्तावेज़ ‘सैचुरेशन, कनेक्ट, फैसिलिटेट, एम्पावर और एंगेज’ की पांच-सूत्रीय रणनीति पर आधारित है। इस कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य बस्तर के सुदूरतम अंचलों तक बुनियादी सुविधाएं पहुँचाना और क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से मजबूती से जोड़ना है। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को मानसून के बाद बस्तर आने का औपचारिक आमंत्रण भी दिया, ताकि उनकी उपस्थिति में कई बड़ी परियोजनाओं की नींव रखी जा सके।
कनेक्टिविटी पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि 2027 तक प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सभी लंबित सड़कों को पूरा कर लिया जाएगा। योजना के अंतर्गत 228 नई सड़कों और 267 पुलों का निर्माण प्रस्तावित है, जिससे दुर्गम गांवों की पहुँच शहरों तक आसान होगी। इसके अलावा, रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन और जगदलपुर एयरपोर्ट के विस्तार जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को गति दी जा रही है। इन पहलों का उद्देश्य बस्तर की भौगोलिक बाधाओं को दूर कर उसे एक बड़े आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करना है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी क्रांतिकारी बदलाव की तैयारी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि दंतेवाड़ा में नया मेडिकल कॉलेज और जगरगुंडा एवं ओरछा में आधुनिक ‘एजुकेशन सिटी’ का निर्माण किया जा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों और डॉक्टरों के लिए ट्रांजिट हॉस्टल का जाल बिछाया जा रहा है। साथ ही, 45 पोटा केबिन स्कूलों को अब स्थायी और भव्य भवनों में बदला जा रहा है, ताकि आदिवासियों के बच्चों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
कृषि और आजीविका को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने इंद्रावती नदी पर देउरगांव और मटनार जैसी सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति दी है। इन परियोजनाओं से लगभग 31,840 हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होगी, जिससे किसानों की आय में भारी वृद्धि होगी। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 तक बस्तर के 85 प्रतिशत परिवारों की मासिक आय 15,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये की जाए। इस आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सरकार ने एक तीन वर्षीय विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।
रोजगार और कौशल विकास की दिशा में मुख्यमंत्री ने ‘विकसित भारत@2047’ और ‘अंजोर विजन 2047’ का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि राज्य में नई स्टार्टअप नीति लागू की गई है, जिसके तहत 2030 तक 5,000 नए स्टार्टअप तैयार करने का लक्ष्य है। अब तक एक लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जिनमें से 40 हजार युवाओं को सम्मानजनक रोजगार भी प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त, युवाओं के लिए 15 नए स्टेडियम और खेल परिसर भी बनाए जा रहे हैं।
बस्तर की वैश्विक पहचान बनाने के लिए पर्यटन क्षेत्र पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे प्रसिद्ध जलप्रपातों के साथ-साथ कांगेर घाटी नेशनल पार्क में एडवेंचर टूरिज्म और ग्लास ब्रिज जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से स्थानीय कला और संस्कृति को दुनिया के सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन और आय के नए स्रोत खुलेंगे।
प्रशासन को जनता के द्वार तक ले जाने के लिए ‘बस्तर मुन्ने’ (अग्रणी बस्तर) कार्यक्रम की घोषणा की गई है। इस कार्यक्रम के तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में विशेष शिविर लगाए जाएंगे, जहाँ प्रशासनिक अधिकारी स्वयं उपस्थित रहकर लोगों की समस्याओं का समाधान करेंगे और सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे प्रदान करेंगे। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र हितग्राही सरकारी लाभ से वंचित न रहे और विकास की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
मुलाकात के अंत में मुख्यमंत्री ने ‘नियद नेल्ला नार 2.0’ योजना के विस्तार की जानकारी दी। अब यह योजना बस्तर के साथ-साथ गरियाबंद और मोहला-मानपुर जैसे नए जिलों में भी लागू की जाएगी। प्रधानमंत्री मोदी ने मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत इस व्यापक ब्लूप्रिंट की सराहना की और बस्तर के विकास में हर संभव केंद्रीय सहयोग का आश्वासन दिया। यह मुलाकात छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों के लिए एक नए सूर्योदय का संकेत मानी जा रही है।

