मध्य पूर्व में तनाव एक विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है, जहां अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक, करज का B1 पुल, पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। अल्बोर्ज़ प्रांत में स्थित इस आधुनिक पुल पर दो भीषण हवाई हमले किए गए, जिसके परिणामस्वरूप पुल का एक बड़ा हिस्सा ढह गया और कम से कम दो लोगों की जान चली गई। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में हमले के बाद पुल से भीषण आग और धुएं का गुबार उठता देखा गया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे ईरान के लिए एक कड़ा संदेश बताया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि ईरान का यह सबसे बड़ा पुल अब कभी इस्तेमाल के लायक नहीं रहेगा और यह तो बस शुरुआत है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व को सलाह दी कि इससे पहले कि देश पूरी तरह तबाह हो जाए, उन्हें मेज पर आकर समझौता कर लेना चाहिए। ट्रंप के इस बयान ने क्षेत्र में भविष्य के और भी बड़े हमलों की आशंका को जन्म दे दिया है।
इस हमले के जवाब में ईरान ने “जैसे को तैसा” की नीति अपनाते हुए मध्य पूर्व के आठ प्रमुख पुलों की एक ‘हिट लिस्ट’ जारी की है। ईरान की अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने इन पुलों को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के संभावित लक्ष्यों के रूप में प्रकाशित किया है। ईरान का यह कदम सीधे तौर पर उन देशों को चेतावनी है जो अमेरिका और इजरायल के साथ रणनीतिक संबंधों में हैं या उन्हें सैन्य सहायता प्रदान कर रहे हैं।
ईरान की इस लिस्ट में खाड़ी देशों और जॉर्डन के वे पुल शामिल हैं जो सामरिक और आर्थिक दृष्टि से जीवनरेखा माने जाते हैं। इनमें कुवैत का विशाल शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबाह समुद्री पुल, सऊदी अरब और बहरीन को जोड़ने वाला किंग फहद कॉज़वे, तथा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के महत्वपूर्ण शेख जायद और अल मक़ता जैसे पुल शामिल हैं। इसके अलावा जॉर्डन के किंग हुसैन और अब्दौन पुलों को भी खतरे की जद में बताया गया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हमले के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि नागरिक बुनियादी ढांचों पर हमले करना दुश्मन की हताशा और नैतिक पतन को दर्शाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की कार्रवाइयां ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर नहीं कर पाएंगी। अराघची का बयान संकेत देता है कि ईरान पीछे हटने के बजाय अब और अधिक आक्रामक तरीके से अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव को बचाने की कोशिश करेगा।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान ने अपनी इस सूची पर अमल किया, तो पूरा मध्य पूर्व एक भयावह क्षेत्रीय युद्ध की चपेट में आ सकता है। इन पुलों के नष्ट होने का मतलब केवल यातायात बाधित होना नहीं, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापारिक मार्ग का ठप होना भी है। वर्तमान स्थिति ने खाड़ी के उन देशों को भी असुरक्षित कर दिया है जो अब तक सीधे तौर पर इस संघर्ष का हिस्सा नहीं थे, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंता फैल गई है।

