मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर आ रही है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब ईरान के खिलाफ सैन्य मोर्चे पर उतरने की तैयारी कर रहा है। UAE, अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ मिलकर होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को सुरक्षित करने और इसे जबरदस्ती खुलवाने में मदद कर सकता है।
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव ने इस समुद्री मार्ग के लिए खतरा पैदा कर दिया है। ईरानी शासन इस समय अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है और आशंका है कि वह अपनी हार सुनिश्चित देखकर इस रास्ते को बंद कर सकता है। UAE के अधिकारियों का मानना है कि ईरान वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचाने के लिए इस चोकपॉइंट का इस्तेमाल एक हथियार के तौर पर कर सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रांजिट मार्ग है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह रास्ता मात्र 33 किलोमीटर चौड़ा है। दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, कुवैत और इराक जैसे देशों की अर्थव्यवस्था इसी रास्ते पर निर्भर है, इसलिए इसे खुला रखना वैश्विक स्थिरता के लिए अनिवार्य है।

रिपोर्ट में एक दिलचस्प मोड़ यह भी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस युद्ध को जल्द से जल्द खत्म करना चाहते हैं। ट्रंप की योजना होर्मुज के मुद्दे को बाद के लिए टालने की है, लेकिन UAE जैसे खाड़ी देश इसके खिलाफ हैं। वे चाहते हैं कि अमेरिका इस खतरे का स्थायी समाधान करे और पीछे न हटे।
अगर UAE सीधे तौर पर सैन्य कार्रवाई में शामिल होता है, तो वह खाड़ी का पहला ऐसा देश बन जाएगा जो ईरान के खिलाफ सीधे युद्ध में उतरेगा। अब तक ये देश पर्दे के पीछे से समर्थन देते रहे हैं, लेकिन अब वे अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए खुद जंग के मैदान में उतरने को तैयार दिख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से जंग का दायरा काफी बढ़ सकता है। यदि होर्मुज स्ट्रेट में थोड़ी भी सैन्य हलचल होती है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत समेत पूरी दुनिया की जेब पर पड़ेगा। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें अब वॉशिंगटन और खाड़ी देशों के अगले कदम पर टिकी हैं।

