पुणे | पुणे मेट्रो की सुरक्षा में एक बड़ी सेंध का मामला सामने आया है। शिवाजी रोड के पास एक निजी जमीन पर बोरवेल की खुदाई के दौरान ड्रिलर सीधे मेट्रो की भूमिगत सुरंग (टनल) की छत को चीरते हुए अंदर जा घुसा। इस लापरवाही ने करोड़ों की लागत से बनी सुरंग के ढांचे को गंभीर नुकसान पहुँचाया है।
यह चौंकाने वाली घटना शिवाजीनगर और स्वारगेट मेट्रो स्टेशनों के बीच के कॉरिडोर की है। यहाँ जमीन की सतह से करीब 80 से 100 फीट नीचे मेट्रो की टनल गुजरती है। ऊपर निजी भूखंड पर हो रही बोरवेल की ड्रिलिंग इतनी गहराई तक चली गई कि उसने टनल की कंक्रीट की छत को भेद दिया।
अधिकारियों के मुताबिक, इस ड्रिलिंग की वजह से टनल के अंदरूनी हिस्से में 6 इंच व्यास का एक बड़ा सुराख हो गया है। गनीमत यह रही कि जिस समय यह छेद हुआ, उस वक्त नीचे से कोई मेट्रो ट्रेन नहीं गुजर रही थी, अन्यथा बिजली के तारों (OHE) के संपर्क में आने से बड़ा हादसा हो सकता था।
खड़क पुलिस ने इस मामले में महामेट्रो की शिकायत पर मकान मालिक और बोरवेल ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर जानकारी होने के बावजूद लापरवाही बरतने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का आरोप है।
दूसरी ओर, मकान मालिक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि खुदाई केवल पुराने पाइप की सफाई के लिए थी और उन्हें महज 24 फीट पर पानी मिल गया था। हालांकि, टनल में हुआ छेद उनकी दलीलों पर सवाल खड़े कर रहा है।
सुरक्षा के लिहाज से महामेट्रो ने तुरंत कार्रवाई करते हुए टनल में हुए इस छेद को दोनों तरफ (जमीन की सतह और सुरंग के अंदर) से सील कर दिया है। विशेषज्ञों की टीम अब टनल की मजबूती की जांच कर रही है ताकि भविष्य में कोई रिसाव न हो।
इस घटना ने पुणे नगर निगम और भूजल विभाग के बीच तालमेल की कमी को भी उजागर किया है। घनी आबादी वाले इलाकों में इतनी गहरी ड्रिलिंग की अनुमति कैसे मिली या बिना अनुमति के यह काम कैसे हुआ, इसकी जांच जारी है।
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए महामेट्रो अब मेट्रो रूट के संवेदनशील इलाकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी करने जा रहा है। इन इलाकों में रहने वाले नागरिकों को अपनी जमीन के नीचे की वास्तविकता से अवगत कराने के लिए डिजिटल मैपिंग का सहारा लिया जाएगा।

