नई दिल्ली में आयोजित एक टीवी कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कथित शराब घोटाले में निचली अदालत द्वारा आरोप मुक्त (डिस्चार्ज) किए जाने पर पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा। अमित शाह ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस मामले में अभी कानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है और आरोपियों के खिलाफ जांच एजेंसियों के पास “काफी दमदार सबूत” मौजूद हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल एक अदालत के फैसले के आधार पर किसी को क्लीन चिट नहीं दी जा सकती, क्योंकि मामला अभी ऊपरी अदालतों में विचाराधीन है।
गृह मंत्री ने देश की त्रिस्तरीय न्यायिक प्रणाली का हवाला देते हुए कहा कि सेशंस कोर्ट का फैसला अंतिम नहीं होता। उन्होंने बताया कि सरकार ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को पहले ही दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दे दी है और आवश्यकता पड़ने पर मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा। शाह ने तंज कसते हुए कहा कि जब तक सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी को भी खुद को “कट्टर ईमानदार” का लेबल नहीं देना चाहिए। उन्होंने भरोसा जताया कि जो चार्जशीट दाखिल की गई है, वह कानूनी रूप से बेहद मजबूत है।
राजनीतिक मोर्चे पर हमला बोलते हुए अमित शाह ने अरविंद केजरीवाल की नई दिल्ली विधानसभा सीट से हुई चुनावी हार का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति हकीकत से दूर रहकर “दिन में सपने देखने” में लगा रहे, तो उसे कोई नहीं बचा सकता। शाह ने सुझाव दिया कि केजरीवाल को अपनी पार्टी के भविष्य के लिए इस हार पर गंभीरता से आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। उन्होंने केजरीवाल द्वारा प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणियों को वास्तविकता से कोसों दूर बताया।
दूसरी ओर, इस मामले की कानूनी पेचीदगियां बढ़ती जा रही हैं। ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत सभी 23 आरोपियों को सबूतों के अभाव में आरोप मुक्त कर दिया था और जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी टिप्पणी की थी। हालांकि, सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने फिलहाल निचली अदालत द्वारा एजेंसी के खिलाफ की गई उन सख्त टिप्पणियों पर रोक लगा दी है। वर्तमान में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही है।
इस बीच, अरविंद केजरीवाल ने वर्तमान बेंच पर संदेह जताते हुए मामले को किसी दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने पहले हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। “आप” नेताओं का तर्क है कि उन्हें वर्तमान बेंच से निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं है। दिल्ली का यह कथित शराब घोटाला पिछले कुछ वर्षों से देश की राजनीति के केंद्र में रहा है और विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद ने आम आदमी पार्टी की चुनावी साख पर भी गहरा असर डाला है।
अदालती कार्यवाही और राजनीतिक बयानबाजी के बीच यह स्पष्ट है कि दिल्ली शराब घोटाले की लड़ाई अभी लंबी चलने वाली है। जहां एक ओर भाजपा इसे भ्रष्टाचार का बड़ा मुद्दा बनाकर “आप” को घेर रही है, वहीं आम आदमी पार्टी इसे राजनीतिक साजिश करार दे रही है। अब सबकी नजरें दिल्ली हाई कोर्ट और आने वाले समय में सुप्रीम कोर्ट के रुख पर टिकी हैं, जो इस पूरे विवाद का अंतिम फैसला तय करेंगे।

