मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक अभूतपूर्व और खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है। ईरान ने खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देशों, विशेष रूप से बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को एक कड़ा अल्टीमेटम जारी किया है। ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का दावा है कि अमेरिकी सैन्य अड्डों के तबाह होने के बाद अमेरिकी सैनिक अब इन देशों के नागरिक होटलों और दफ्तरों में शरण ले रहे हैं। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि इन नागरिक ठिकानों में विदेशी सैन्य कर्मियों को पनाह देना जारी रखा गया, तो ये स्थान ईरान की मिसाइल और ड्रोन कार्रवाई के सीधे निशाने पर होंगे।
ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान इस ओर आकर्षित किया। उन्होंने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिकी सेना निर्दोष नागरिकों को ‘मानव ढाल’ (Human Shield) के रूप में इस्तेमाल कर रही है। अराघची ने तर्क दिया कि जिस तरह सुरक्षा कारणों से अमेरिका में संदिग्ध व्यक्तियों की होटल बुकिंग रद्द कर दी जाती है, ठीक वैसी ही नीति खाड़ी देशों को भी अपनानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सैन्य कर्मियों को नागरिक क्षेत्रों से तुरंत बाहर किया जाना चाहिए।
समाचार एजेंसी ‘फार्स’ और ‘शिन्हुआ’ की रिपोर्टों के अनुसार, यह स्थिति ईरान और उसके सहयोगी समूहों द्वारा चलाए गए एक व्यापक ‘जॉइंट ऑपरेशन’ के बाद पैदा हुई है। इन रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पूरे मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है, जिसके कारण सेना को वैकल्पिक ठिकानों की तलाश करनी पड़ रही है। बताया जा रहा है कि दमिश्क के ‘फोर सीजंस’ और ‘शेरेटन’ जैसे प्रतिष्ठित होटलों के साथ-साथ बेरूत और इस्तांबुल जैसे शहरों में भी अमेरिकी मौजूदगी देखी गई है, जो अब सीधे खतरे की जद में हैं।
ईरान की इस चेतावनी ने न केवल कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि वैश्विक पर्यटन और विमानन क्षेत्र (Aviation Sector) के लिए भी एक गंभीर संकट पैदा कर दिया है। बहरीन और यूएई जैसे देश, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पर्यटन के प्रमुख केंद्र हैं, अब एक बड़े धर्मसंकट में हैं। यदि वे ईरान की बात मानते हैं, तो उनके अमेरिका के साथ सुरक्षा संबंध प्रभावित होंगे, और यदि वे इसे नजरअंदाज करते हैं, तो उनके नागरिक और बुनियादी ढांचे पर सीधे हमले का खतरा मंडरा रहा है।
इस घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू अंतरराष्ट्रीय कानूनों का संभावित उल्लंघन है। नागरिक ठिकानों को युद्ध क्षेत्र में तब्दील करना जिनेवा कन्वेंशन के सिद्धांतों के खिलाफ है। ईरान का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि वह अब अपने विरोधियों को उनके पारंपरिक अड्डों के बाहर भी चुनौती देने के लिए तैयार है। यह स्थिति न केवल मध्य पूर्व की क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रही है, बल्कि दुनिया की नजरों में एक संभावित बड़े युद्ध का संकेत दे रही है।
वर्तमान में पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन और खाड़ी देशों की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। क्या अमेरिका अपनी सैन्य तैनाती में बदलाव करेगा या ईरान की इस चेतावनी को युद्ध की घोषणा मानकर जवाबी कार्रवाई करेगा? आने वाले कुछ दिन वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत निर्णायक साबित होने वाले हैं, क्योंकि नागरिक सुरक्षा अब सीधे तौर पर सैन्य संघर्ष के बीच में आ फंसी है।

