छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और आईजी (IG) रतन लाल डांगी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। गृह विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, यह कदम प्रशासनिक अनुशासन और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए उठाया गया है। इस कार्रवाई ने पूरे पुलिस विभाग और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।
निलंबन की मुख्य वजह एक सब-इंस्पेक्टर (SI) की पत्नी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप हैं। पीड़ित महिला ने डांगी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने अधिकारी पर पद का दुरुपयोग और प्रताड़ना के आरोप लगाए। मामला तब और पेचीदा हो गया जब सोशल मीडिया पर अधिकारी से संबंधित कुछ आपत्तिजनक तस्वीरें और चैट वायरल होने लगीं, जिससे विभाग की छवि पर गहरा असर पड़ा।
दूसरी ओर, आईपीएस रतन लाल डांगी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए महिला पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया है। डांगी का पक्ष है कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है और उन्होंने इस संबंध में पहले ही शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, सरकार ने प्राथमिक साक्ष्यों और सोशल मीडिया पर वायरल हुई सामग्री को संज्ञान में लेते हुए विभागीय जांच पूरी होने तक उन्हें पद से हटाना ही उचित समझा।
निलंबन की अवधि के दौरान रतन लाल डांगी का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय (PHQ), नवा रायपुर तय किया गया है। आदेश के मुताबिक, वे बिना पूर्व अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे और उन्हें नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। यह पूरी कार्रवाई अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत की गई है, जो यह स्पष्ट करता है कि उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के आचरण को लेकर सरकार का रुख बेहद सख्त है।

यह मामला अब कानूनी और विभागीय जांच के घेरे में है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए यह निलंबन अनिवार्य था। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि अधिकारी पर आगे क्या दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, इस घटना ने पुलिस प्रशासन के भीतर नैतिकता और अनुशासन के सवाल को फिर से चर्चा में ला दिया है।

