छत्तीसगढ़ के रायपुर से महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी मामले में एक बड़ी खबर सामने आई है, जहाँ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। प्रवर्तन निदेशालय के रायपुर जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत एक अस्थायी जब्ती आदेश जारी करते हुए लगभग 1700 करोड़ रुपये की भारतीय और विदेशी संपत्तियां जब्त कर ली हैं। इस कार्रवाई ने सट्टेबाजी सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है।
ED द्वारा जब्त की गई इन संपत्तियों में दुबई (UAE) स्थित 18 अचल संपत्तियां और नई दिल्ली की 2 अचल संपत्तियां शामिल हैं। विदेशी संपत्तियों में दुबई के सबसे महंगे और पॉश इलाकों जैसे दुबई हिल्स एस्टेट, बिजनेस बे और मशहूर बुर्ज खलीफा में स्थित लक्जरी विला और हाई-एंड अपार्टमेंट्स को निशाना बनाया गया है। यह संपत्तियां सौरभ चंद्राकर और उसके करीबियों जैसे विकास छपारिया, रोहित गुलाटी और नितिन टिबरेवाल के नाम पर दर्ज पाई गई थीं।
जांच में खुलासा हुआ है कि यह पूरा साम्राज्य अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी से हुई ‘अपराध की कमाई’ (Proceeds of Crime) से खड़ा किया गया था। महादेव ऑनलाइन बुक केवल एक ऐप नहीं, बल्कि एक विशाल अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट था, जो Tiger Exchange और Gold365 जैसे कई प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से संचालित होता था। यह नेटवर्क भारत भर में फैले ‘पैनलों’ और ‘शाखाओं’ के माध्यम से चलता था, जबकि इसके मुख्य प्रमोटर दुबई से इसे नियंत्रित करते थे।
पैसे के लेन-देन के तरीके (Modus Operandi) ने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। प्रमोटर सट्टेबाजी से होने वाले मुनाफे का 70-75% हिस्सा खुद रखते थे। इस काली कमाई को वैध दिखाने के लिए हजारों ‘म्यूल’ (अज्ञात व्यक्तियों के बैंक खाते) का इस्तेमाल किया गया। बाद में इस पैसे को हवाला, क्रिप्टोकरेंसी और जटिल वित्तीय लेनदेन के जरिए भारत से बाहर भेजकर कीमती संपत्तियों में निवेश किया गया।
ED की यह कार्रवाई छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। इन मामलों में सरकारी अधिकारियों और सट्टेबाजी से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की धाराएं लगाई गई थीं। जांच के दौरान पता चला कि इस सिंडिकेट ने न केवल आम लोगों को ठगा, बल्कि अवैध तरीके से विदेशी मुद्रा को भी देश से बाहर भेजा।
अब तक की प्रगति के अनुसार, ED ने देश भर में 175 से अधिक स्थानों पर तलाशी ली है और 13 लोगों को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा, रायपुर की विशेष अदालत में 74 लोगों के खिलाफ पांच अभियोजन शिकायतें दर्ज की गई हैं। सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल और शुभम सोनी जैसे मुख्य आरोपियों को ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है ताकि उनकी अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों को पूरी तरह कुर्क किया जा सके।
आज की तारीख तक, इस मामले में कुल जब्त चल और अचल संपत्तियों का मूल्य लगभग 4336 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ED अभी भी अवैध सट्टेबाजी के इस जाल से जुड़े अन्य स्रोतों और ‘अपराध की कमाई’ का पता लगाने के लिए निरंतर छापेमारी और जांच जारी रखे हुए है।

