बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सहायक प्राध्यापक भर्ती परीक्षा 2019 को लेकर पिछले कई वर्षों से चल रहे विवाद पर विराम लगा दिया है। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए वर्तमान चयन सूची को पूरी तरह से वैध और संवैधानिक घोषित किया है। न्यायमूर्ति की खंडपीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की संवैधानिक अनियमितता नहीं पाई गई है, जिससे अब प्रदेश के कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है।
न्यायालय ने अपने आदेश में आरक्षण के नियमों पर एक महत्वपूर्ण व्याख्या दी है। कोर्ट ने कहा कि यदि आरक्षित वर्ग (OBC, SC, ST) का कोई अभ्यर्थी अपनी योग्यता के आधार पर अनारक्षित (General) श्रेणी के कट-ऑफ से अधिक अंक प्राप्त करता है, तो उसे नियमानुसार सामान्य श्रेणी में ही जगह दी जाएगी। इस स्पष्टीकरण ने उन आपत्तियों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया है जिनमें आरक्षण प्रक्रिया के क्रियान्वयन पर सवाल उठाए गए थे।
इसके अतिरिक्त, याचिकाकर्ताओं द्वारा भर्ती नियमों में किए गए संशोधनों को भी चुनौती दी गई थी, जिसे कोर्ट ने अनुचित माना है। अदालत ने सरकार और चयन आयोग द्वारा किए गए संशोधनों को सही ठहराते हुए कहा कि प्रशासनिक सुधार और पारदर्शिता के लिए किए गए बदलाव नियमों के दायरे में हैं। इस निर्णय के आने के बाद पिछले पांच वर्षों से संशय और मानसिक तनाव झेल रहे चयनित अभ्यर्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
हाई कोर्ट के इस फैसले से प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी। सहायक प्राध्यापकों के रिक्त पदों पर भर्ती होने से कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार आएगा। अब राज्य शासन को केवल नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया पूरी करनी है, जिससे चयनित उम्मीदवारों की जॉइनिंग का मार्ग अब पूरी तरह प्रशस्त हो गया है।

