नई दिल्ली, 14 मार्च 2026: भारतीय साहित्य जगत के सबसे प्रतिष्ठित ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ की घोषणा कर दी गई है। वर्ष 2025 के लिए 60वां ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रख्यात तमिल कवि, गीतकार और लेखक आर. वैरामुथु को प्रदान किया जाएगा। भारतीय ज्ञानपीठ की चयन समिति ने तमिल साहित्य में उनके अद्वितीय योगदान और विशिष्ट काव्यात्मक अभिव्यक्ति को देखते हुए सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया।
चयन समिति की अध्यक्षता प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. प्रतिभा राय ने की। इस उच्च स्तरीय बैठक में माधव कौशिक, दामोदर माउजओ और डॉ. सुरंजन दास सहित देश के कई दिग्गज विद्वान शामिल थे। भारतीय ज्ञानपीठ के महाप्रबंधक आर. एन. तिवारी ने इस महत्वपूर्ण निर्णय की आधिकारिक जानकारी साझा की। बैठक की शुरुआत में दिवंगत अध्यक्ष जस्टिस विजेंद्र जैन और निदेशक मधुसूदन आनंद को मौन रखकर श्रद्धांजलि भी दी गई।
13 जुलाई 1953 को तमिलनाडु में जन्मे आर. वैरामुथु समकालीन तमिल साहित्य के सबसे प्रभावशाली हस्ताक्षर माने जाते हैं। उनके लेखन की सबसे बड़ी विशेषता मानवीय संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और प्रकृति के प्रति उनकी गहरी संवेदनशीलता है। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से तमिल संस्कृति और आधुनिक समाज के द्वंद्व को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।
वैरामुथु का साहित्यिक और कलात्मक सफर उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्हें अब तक सात बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ गीतकार) से नवाजा जा चुका है। इसके अतिरिक्त, भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण (2014) और पद्म श्री (2003) जैसे नागरिक सम्मानों से भी सम्मानित किया है। उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘कल्लिकडू इथिहासम’ के लिए उन्हें 2003 में साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिल चुका है।
साहित्यिक गलियारों में इस घोषणा का पुरजोर स्वागत किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैरामुथु को यह सम्मान मिलना तमिल भाषा की समृद्ध काव्य परंपरा का सम्मान है। तमिलनाडु सरकार ने भी उन्हें कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पूर्व में ‘कलैमामणि’ पुरस्कार से सम्मानित किया था, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।
ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलना किसी भी भारतीय लेखक के लिए शिखर उपलब्धि मानी जाती है। आर. वैरामुथु को यह पुरस्कार मिलने से तमिल साहित्य को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान और ऊर्जा मिलेगी। उनकी कृतियाँ न केवल वर्तमान पीढ़ी को प्रेरित कर रही हैं, बल्कि वे आने वाले समय के लेखकों के लिए भी एक मानक स्थापित करती हैं।

