फीफा वर्ल्ड कप 2026: युद्ध और तनाव के बीच ईरान का बड़ा फैसला
ईरान ने खेल जगत को चौंकाते हुए आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह आगामी FIFA World Cup 2026 में हिस्सा नहीं लेगा। ईरान के खेल मंत्री अहमद दोन्यामाली ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि देश के मौजूदा हालात और अमेरिका के साथ चल रहे भीषण सैन्य संघर्ष के कारण उनकी टीम इस टूर्नामेंट का बहिष्कार करेगी। ईरान का आरोप है कि अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा किए गए हमलों में उनके सर्वोच्च नेतृत्व को अपूरणीय क्षति हुई है, जिसके चलते राष्ट्रीय शोक के माहौल में अमेरिका की धरती पर जाकर खेलना मुमकिन नहीं है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले के पीछे सबसे बड़ा कारण वर्ल्ड कप का वेन्यू (स्थान) है। संयोग से ईरान के ग्रुप चरण के सभी मैच अमेरिका के लॉस एंजिल्स और सिएटल जैसे शहरों में होने थे। ईरान सरकार ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए कहा है कि युद्ध जैसी स्थिति में उनके खिलाड़ियों और नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जा सकती। खेल मंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि जिस देश के साथ उनका सीधा सैन्य टकराव चल रहा हो, वहाँ खेल के माध्यम से सौहार्द दिखाना उनके आत्मसम्मान के विरुद्ध है।
ईरान के इस कदम ने फीफा (FIFA) और फुटबॉल प्रशंसकों के बीच खलबली मचा दी है। ईरान ने क्वालीफाइंग राउंड में शानदार खेल दिखाते हुए ग्रुप-जी में अपनी जगह बनाई थी, जहाँ उसका मुकाबला बेल्जियम, मिस्र और न्यूजीलैंड जैसी टीमों से होना था। अब ईरान के हटने के बाद फीफा के पास किसी अन्य एशियाई टीम को शामिल करने का विकल्प बचा है। खेल जगत के जानकारों के अनुसार, क्वालीफाइंग टेबल में ईरान के ठीक नीचे रहने वाली टीम जैसे इराक या संयुक्त अरब अमीरात (UAE) को इस मेगा इवेंट में शामिल होने का मौका मिल सकता है।
यह फुटबॉल इतिहास की एक दुर्लभ घटना है क्योंकि आधुनिक दौर में शायद ही किसी बड़ी टीम ने राजनीतिक कारणों से वर्ल्ड कप जैसे मंच का त्याग किया हो। जहाँ एक तरफ ईरानी नागरिक अपने देश के फैसले का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ फुटबॉल प्रेमी इस बात से निराश हैं कि वे एशिया की एक मजबूत टीम को वर्ल्ड कप में खेलते नहीं देख पाएंगे। अब पूरी दुनिया की नजरें फीफा के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस खाली जगह को कैसे भरता है और ईरान पर इसके क्या अनुशासनात्मक परिणाम हो सकते हैं।

