बलरामपुर के कुसमी में अफीम की खेती का यह मामला छत्तीसगढ़ में नशे के अवैध कारोबार की एक गहरी और सुनियोजित जड़ की ओर इशारा करता है। यह महज इत्तेफाक नहीं है कि दुर्ग के बाद अब बलरामपुर के त्रिपुरी गांव में 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में अफीम लहलहाती मिली। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि स्थानीय ग्रामीणों को “फूलों की खेती” का झांसा देकर झारखंड के लोगों ने रूपदेव और कौशल भगत की जमीन किराए पर ली और बेखौफ होकर चूहीदाह नाले से सिंचाई करते रहे।
इस पूरे घटनाक्रम में ग्रामीण जागरूकता की बड़ी भूमिका रही, क्योंकि दुर्ग में विनायक ताम्रकार पर हुई कार्रवाई की खबर देखकर ही स्थानीय लोगों को अहसास हुआ कि उनके पड़ोस में चल रहा काम कानूनी नहीं, बल्कि एक बड़ा अपराध है। पुलिस ने फिलहाल 5 लोगों को हिरासत में लिया है जो झारखंड से आकर वहां झोपड़ियों में रह रहे थे, लेकिन इस मामले के तार जशपुर के एक भाजपा नेता से जुड़ने के कारण यह अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है।
जहाँ एक तरफ मंत्री राजेश अग्रवाल इसे सरकार की सक्रियता और नशे के सौदागरों के खिलाफ ‘अल्र्ट मोड’ बता रहे हैं, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यह सब सत्ता के संरक्षण में हो रहा है और दुर्ग मामले की तरह यहाँ भी रसूखदारों को बचाने की कोशिश की जा सकती है। फिलहाल पुलिस की पूछताछ जारी है और यह देखना अहम होगा कि इस सिंडिकेट के असली मास्टरमाइंड तक प्रशासन के हाथ पहुँच पाते हैं या नहीं।

