नीम करोली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर अपनी असाधारण सफलता से सबको चौंका दिया है। महज 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने रिलीज के 26वें दिन तक लगभग 55 करोड़ रुपये का शानदार कारोबार कर लिया है। इस फिल्म की सफलता को वर्तमान हिंदी सिनेमा जगत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
दुनियाभर में नीम करोली बाबा को एक चमत्कारी संत के रूप में गहरी श्रद्धा के साथ याद किया जाता है। आम जनता से लेकर देश-विदेश की कई जानी-मानी हस्तियां उनके प्रति अगाध आस्था रखती हैं। ऐसे में उनके जीवन और आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित इस फिल्म को लेकर सिनेमाप्रेमियों और भक्तों में शुरुआत से ही भारी उत्साह देखा गया है।
इस फिल्म की सफलता का सबसे दिलचस्प पहलू इसका माउथ पब्लिसिटी यानी दर्शकों के जरिए खुद-ब-खुद प्रचार होना है। शुरुआती दिनों में इस फिल्म को देश भर में बेहद सीमित संख्या में यानी केवल 355 शो के साथ रिलीज किया गया था। लेकिन जैसे-जैसे दर्शक फिल्म देखकर निकलते गए, इसकी चर्चा सोशल मीडिया और आपसी बातचीत के जरिए आग की तरह फैल गई।
जनता के इस अभूतपूर्व समर्थन के चलते 26वें दिन तक आते-आते इस फिल्म के सिनेमाघरों में कुल शो की संख्या बढ़कर 7 हजार से भी अधिक हो गई। दर्शक सिनेमाघरों में फिल्म देखने के बाद बाबा से जुड़े चमत्कारी प्रसंगों और उनकी लीलाओं को एक-दूसरे के साथ साझा करने लगे, जिससे बॉक्स ऑफिस पर टिकट खिड़की के आंकड़े लगातार बढ़ते चले गए।
फिल्म की इस अप्रत्याशित सफलता ने करीब 51 साल पहले यानी 1975 में रिलीज हुई फिल्म ‘जय संतोषी मां’ की यादें ताजा कर दी हैं। उस दौर में भी ‘जय संतोषी मां’ के निर्माता-निर्देशक या कलाकार कोई बड़े चर्चित चेहरे नहीं थे, लेकिन आम जनता की गहरी धार्मिक आस्था और भक्ति भाव ने उस फिल्म को उस समय की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ के सामने भी शानदार व्यवसाय करने के लिए प्रेरित किया था।
‘हनुमान अंश’ का लेखन और निर्देशन पहली बार फिल्म निर्माण में उतरे विशाल चतुर्वेदी ने किया है। पेशे से डॉक्टर रहे विशाल चतुर्वेदी की यह फिल्म उनकी ही चर्चित किताब ‘Divine Detour’ की पटकथा पर आधारित है। फिल्म के मुख्य कलाकारों में शोभिनव सत्या ने नीम करोली बाबा की भूमिका निभाई है, जबकि उनके साथ चंदन आनंद, निखिल दुबे, उदय सिंह राजपूत और अनिल रस्तोगी जैसे नए चेहरे नजर आए हैं।
फिल्म के निर्माताओं ने इसमें बड़े स्तर के वीएफएक्स, सीजीआई या भारी-भरकम वर्चुअल सेट का इस्तेमाल करने से परहेज किया है। इसके बजाय कहानी की सरलता, घटनाओं की प्रामाणिकता और बाबा के जीवन से जुड़े चमत्कारों को बेहद सहज रूप से पर्दे पर उतारा गया है। बाबा के बचपन से लेकर प्रकृति, गौरैया और जंगल के जीव-जंतुओं के साथ उनके संवाद को बहुत ही काव्यात्मक और सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
‘जय संतोषी मां’ की तरह ही ‘हनुमान अंश’ के साथ भी ऐसा माहौल बन गया है कि कई सिनेमाघरों के भीतर का दृश्य किसी मंदिर या आध्यात्मिक स्थल जैसा प्रतीत होता है। भक्त इसे केवल एक मनोरंजन का माध्यम न मानकर अपनी गहरी आस्था का प्रतीक मान रहे हैं। एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स, मार्क जुकरबर्ग, जूलिया रॉबर्ट्स, अनुष्का शर्मा, विराट कोहली और मनोज बाजपेयी जैसी हस्तियों के जीवन पर भी नीम करोली बाबा का गहरा प्रभाव रहा है। यह फिल्म एक बार फिर यह साबित करती है कि भारतीय दर्शकों के दिलों में आध्यात्मिक और धार्मिक कथाओं के लिए आज भी अत्यंत मजबूत और जीवंत स्थान सुरक्षित है।

