ईरान के हालिया ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद कतर एनर्जी ने अपनी सबसे महत्वपूर्ण रास लैफन (Ras Laffan) फैसिलिटी को 2 मार्च 2026 से पूरी तरह बंद कर दिया है। यह कदम वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है, क्योंकि यह अकेला प्लांट दुनिया की कुल हीलियम सप्लाई का लगभग 33% हिस्सा पैदा करता है। इस बंदी के कारण हर महीने करीब 52 लाख क्यूबिक मीटर हीलियम का उत्पादन रुक गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इस दुर्लभ गैस के लिए हाहाकार मच गया है।
हीलियम की इस भारी किल्लत का सीधा और सबसे घातक असर सेमीकंडक्टर चिप प्रोडक्शन और मेडिकल इंडस्ट्री पर पड़ रहा है। चिप बनाने वाली फैक्ट्रियों (Fabs) में हीलियम का उपयोग हवा को शुद्ध रखने और तापमान नियंत्रित करने के लिए किया जाता है; इसके बिना आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उत्पादन असंभव है। वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं में MRI मशीनों को चालू रखने के लिए हीलियम एक अनिवार्य तत्व है, जो इसके सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को ठंडा रखती है। इसके अलावा, स्पेस इंडस्ट्री में रॉकेट ईंधन को दबाव में रखने के लिए भी इसी गैस का उपयोग होता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि रास लैफन की यह बंदी 60 से 90 दिनों तक जारी रहती है, तो दुनिया भर में एमआरआई स्कैन बंद हो सकते हैं और टेक सेक्टर में चिप की कमी के कारण स्मार्टफोन से लेकर कारों तक की कमी हो सकती है।

